लैलूंगा: सरकारी निर्माण की भेंट चढ़ा गरीब का आशियाना, सीमांकन के दौरान खुली दावों की पोल…

रायगढ़। प्रशासन के आदेश पर शुक्रवार को ग्राम राजपुर में जब भूमि का सीमांकन शुरू हुआ, तो एक ऐसी हकीकत सामने आई जिसने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उससे ग्रामीणों को होने वाले नुकसान पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है मामला? – तहसीलदार लैलूंगा के आदेश दिनांक 19/02/2026 के अनुपालन में, आज 11 जुलाई 2026 को पटवारी हल्का नंबर 03 और राजस्व विभाग की टीम ग्राम राजपुर पहुंची। यह कार्रवाई आवेदक राकेश बेहरा की खसरा नंबर 380/6 (रकबा 0.676 हेक्टेयर) की भूमि के सीमांकन के लिए की गई थी।

विभाजित भूमि और सरकारी दखल – सीमांकन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आवेदक की भूमि का एक बड़ा हिस्सा पहले ही भू-अर्जन प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ शासन (राजस्व विभाग) के नाम दर्ज हो चुका है। वर्तमान में यह भूमि तीन टुकड़ों में विभाजित है:
- पहला हिस्सा 0.368 हेक्टेयर।
- दूसरा हिस्सा 0.132 हेक्टेयर (जो लैलूंगा-बाकारुमा मार्ग के रूप में चिन्हित है)।
- तीसरा हिस्सा 0.308 हेक्टेयर।
क्षतिग्रस्त आवास : ‘विकास’ की मार या प्रशासनिक लापरवाही? – इस सीमांकन की सबसे दुखद कड़ी आवेदक का वह ‘श्रमिक आवास’ है, जो सरकारी निर्माण कार्य के कारण मलबे में तब्दील होने की कगार पर है।
- आवेदक राकेश बेहरा ने प्रशासन के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि भू-अर्जन से पूर्व उनकी जमीन (खसरा 380/6) पर 33 वर्ग मीटर क्षेत्र में एक पक्का श्रमिक आवास बना हुआ था।
- आवेदक का आरोप है कि सरकारी सड़क निर्माण कार्य के दौरान हुई लापरवाही के कारण इस आवास की छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है।
- इतना ही नहीं, निर्माण के कारण उनके आवागमन का मार्ग भी पूरी तरह अवरुद्ध और क्षतिग्रस्त हो चुका है।
गवाहों की मौजूदगी में दर्ज हुआ पंचनामा – राजस्व अमले की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान मौके पर मुकेश, सोमेश कुमार, सिद्धार्थ, शरद, धर्मेंद्र कुमार और तुलसी जैसे कई स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने इस पंचनामे पर हस्ताक्षर कर स्थिति की पुष्टि की है।
बड़ा सवाल : अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या पीडब्ल्यूडी और प्रशासन की देखरेख में हुए निर्माण कार्य से पीड़ित राकेश बेहरा को उनकी क्षतिग्रस्त संपत्ति का मुआवजा मिलेगा? या फिर यह गरीब का आशियाना इसी तरह सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा? प्रशासन द्वारा तैयार किया गया यह पंचनामा अब इस बात का प्रमाण है कि सरकारी निर्माण से निजी संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
यह रिपोर्ट 11 जुलाई 2026 को तैयार किए गए आधिकारिक पंचनामा और सीमांकन सूचना पत्र के तथ्यों पर आधारित है।




