रायगढ़

RTI फाइलें दबाने पर लैलूंगा नगर पंचायत में मचा हड़कंप: राज्य सूचना आयोग ने ठोका ‘अग्निपरीक्षा’ का नोटिस, 25 हजार के जुर्माने से अधिकारी बेहाल!…

रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने पारदर्शिता के साथ खिलवाड़ करने वाले लैलूंगा नगर पंचायत के तत्कालीन अधिकारियों पर अब तक की सबसे ‘कठोर और धारदार’ कार्रवाई शुरू कर दी है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जनहित की जानकारी को तीन साल तक फाइलों में दबाकर रखने वाले अधिकारियों को अब अपनी कुर्सी और जेब—दोनों की चिंता सता रही है। आयोग ने तत्कालीन जनसूचना अधिकारी (PIO) और तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के खिलाफ स्पष्ट दंडात्मक नोटिस जारी किया है।

तीन साल का ‘अंधेरा’, आयोग ने खोला ‘पन्ना’ – मामला 11 मार्च 2022 का है, जब आरटीआई कार्यकर्ता उमेश अग्रवाल ने नगर पंचायत से भवन अनुज्ञा (Building Permission), नियमितीकरण शुल्क और अवैध निर्माणों के खिलाफ हुई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था। नगर पंचायत की लापरवाही का आलम यह था कि आवेदन न केवल धूल फांकता रहा, बल्कि प्रथम अपील के स्तर पर भी अधिकारियों ने इसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

आयोग की ‘थप्पड़’ से थर्राए जिम्मेदार – राज्य सूचना आयोग के द्वितीय अपील (प्रकरण क्रमांक 420221124000514) की सुनवाई के दौरान जो तथ्य उजागर हुए, उन्होंने सरकारी तंत्र की पोल खोल दी है :

  • अधिकारों का अपमान : आयोग ने पाया कि अधिकारी जो पत्राचार कर रहे थे, उनमें अपना नाम और पदनाम तक लिखने की जहमत नहीं उठाई। यह सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का खुला और घोर उल्लंघन है।
  • जवाबदेही का अभाव : आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्कालीन PIO अमित एक्का (तत्कालीन उप अभियंता) और तत्कालीन प्रथम अपीलीय अधिकारी सी.पी. श्रीवास्तव (तत्कालीन CMO) को सीधे निशाने पर लिया है।

25 हजार का जुर्माना और विभागीय जांच की लटकी तलवार – आयोग ने अधिनियम की धारा 20(1) का चाबुक चलाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25,000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। इतना ही नहीं, धारा 20(2) के तहत विभाग को इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश भी की जाएगी।

अगली सुनवाई: ‘अग्निपरीक्षा’ का दिन – आयोग ने मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई 2026, दोपहर 12 बजे एनआईसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, रायगढ़ के माध्यम से निर्धारित की है। आयोग ने तत्कालीन और वर्तमान जिम्मेदार अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर ठोस जवाब नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शिता पर उठे बड़े सवाल – क्या आरटीआई आवेदकों को जानकारी पाने के लिए तीन साल तक सरकारी गलियारों के चक्कर काटने होंगे? क्या नगर पंचायत लैलूंगा में पारदर्शिता सिर्फ कागजों तक सीमित है? आयोग का यह रुख स्पष्ट संकेत है कि सरकारी फाइलों को अपनी जागीर समझने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं। 24 जुलाई का दिन उन अधिकारियों के लिए किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं होगा।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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