शादी का झांसा देकर नाबालिग से रेप करने वाले को 20 साल की जेल: रायगढ़ पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला, बिहार से गिरफ्तार हुआ था आरोपी…

रायगढ़। नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर हवस का शिकार बनाने वाले अपराधियों के खिलाफ रायगढ़ की विशेष पॉक्सो अदालत ने एक कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने 15 वर्षीय किशोरी को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 7 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
सहेली के घर जाने का कहकर निकली थी पीड़िता – यह पूरा मामला जूटमिल थाना क्षेत्र का है। 1 अगस्त 2025 को पीड़िता की मां ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनकी 15 साल की बेटी दोपहर में अपनी सहेली के घर जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने अपने स्तर पर हर संभावित जगह और रिश्तेदारों के यहाँ उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला, तो अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।
बिहार के बेगूसराय से दबोचा गया आरोपी – मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। तकनीकी इनपुट और मुखबिरों की मदद से पुलिस ने घटना के करीब 18 दिन बाद, 19 अगस्त 2025 को पीड़िता को बिहार के बेगूसराय से बरामद किया। पुलिस ने मौके से आरोपी दिलखुश कुमार (24 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया।
‘पत्नी बनाकर रखूँगा’… झांसा देकर किया कई बार दुष्कर्म – बरामदगी के बाद जब पीड़िता के बयान दर्ज किए गए, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। पीड़िता ने बताया कि आरोपी दिलखुश उसे शादी का झांसा देकर अपने साथ भगा ले गया था। उसने पीड़िता को अपनी पत्नी बनाने का झूठा भरोसा दिया और उसकी मजबूरी व नासमझी का फायदा उठाकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।
पीड़िता के इस बयान को आधार बनाते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87, 65(1) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 6 के तहत संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर उसे जेल भेजा और चालान कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट ने कहा- ऐसे अपराधों में कोई रियायत नहीं – मामले की अंतिम सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार साहू की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयानों और मेडिकल साक्ष्यों को मजबूती से कोर्ट के सामने रखा।
शासन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक गोविंद नारायण दुबे ने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें और सबूतों को देखने के बाद अदालत ने आरोपी दिलखुश कुमार को दोषी पाया और उसे 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई।




