रज्जू के “सट्टा साम्राज्य” पर क्या नकेल कस पाएगी पुलिस?

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले के दल्ली राजहरा में पंडर दल्ली क्षेत्र में सट्टा साम्राज्य की बागडोर संभालने वाले बाप बेटे की ओर राजहरा पुलिस का रडार काम ही नहीं करता। आपको बता दें कि इन दोनों पिता पुत्र ने पुलिस विभाग में ऐसी क्या सेटिंग कर रखी है कि राजहरा पुलिस दिखावे और नाम मात्र खानापूर्ति के लिए भी इनकी तरफ झांकती नहीं। कई थाना प्रभारी इस थाने को चार चांद लगाने आए और गए लेकिन किसी में भी दम नहीं था जो पंडर दल्ली के रज्जू सटोरिए और उसके बेटे को हिरासत में ले सके। अब जो भी हो लेकिन शहर के लोगों में आस जगी है कि राजहरा के नए थाना प्रभारी अविनाश सिंह इनके काले खेल को बंद करवा जल्द ही इनके लंबे हाथों में हथकड़ी जरूर लगवाएंगे।
वही गुप्त सूत्रों से खबर मिली है कि इस साल जोर शोर से चल रहे करोड़ों के आईपीएल सट्टे में भी इन सटोरिए बाप बेटे की मिलीभगत थी। छत्तीसगढ़ राज्य में कई अलग अलग थाना क्षेत्रों में आईपीएल सट्टा कारोबार से जुड़े सटोरियों को छत्तीसगढ़ पुलिस पकड़ पकड़कर सलाखों के पीछे धकेल रही थी, लेकिन इस बाबत जिले में एक अजीब सी शांति छाई हुई थी।
पंडर दल्ली में सट्टे के खेल की महक ऐसी फैली हुई थी कि स्थानीय पुलिस उसे सूंघती जरूर बनती, पर कार्यवाही करने से पहले कहीं बार-बार नाक भौं सिकुड़ जाए — ऐसा मानना है शहर वालों का। वर्षों से बाप-बेटे की जोड़ी इस इलाके में खुलेआम सट्टा का साम्राज्य चलाती रही और मानो राजहरा पुलिस उनके सामने सिर्फ औपचारिकता के लिए झंडा लहरा देती रही। अब लोगों की उम्मीदें वहीं टिकी हैं कि नए थाना प्रभारी अविनाश सिंह उस साम्राज्य की कड़ी घुटनों के पास तक तो पहुंचा ही देंगे।
आरोप है कि सटोरिए ने पुलिस के साथ ऐसी महीन “सेटिंग” कर रखी है कि अफसरों का रडार उनके पास जाते ही या तो खराब हो जाता है या फिर अचानक सिग्नल बदल जाता है। कई थाना प्रभारी आए, फोटो खिंचवाए और पुलिसिया कार्यवाही का प्रचार-प्रसार कर गए, पर इनमें से कोई भी इतने कारगर साबित नहीं हुआ कि अवैध सट्टा कारोबार चलाने वाले रज्जू एवं उसके बेटे को गिरफ्तार कर सके। ऐसे में शहर की जनता ने पुलिस की अनुपस्थिति को अकसर व्यंग्य की भाषा में ही सही, पर खूब तंज कसा है।

स्थानीय दुकानदारों, होटलों और चाय की दुकान पर बैठने वालों का मानना है कि रज्जू की पकड़ इतनी मजबूत है कि उसकी सट्टा गतिविधियां पर पुलिस नकेल ही नहीं कस पाती हैं। “किसे रोकेंगे?” हमारी पुलिस तो बस नाम की है — बंद कमरे में फाइलें जमती हैं और बाहर ‘व्यवस्था’ आती-जाती रहती है। किसी ने चुटकी लेते हुए कह दिया कि शायद जिले के पुलिस कप्तान ने राजहरा पुलिस को “शांत व्यवहार” पर प्रशिक्षण दे रखा होगा — ताकि सट्टा खिलाड़ी भावनात्मक रूप से ठेस न खाएं।
पुलिस महकमे के भीतर भी इस मामले को लेकर फुसफुसाहटें रही हैं। कुछ पुराने अफसरों का कहना है कि पिछली पाली में थाने के प्रमुखों को दबाव और प्रभाव दोनों झेलने पड़े, इसलिए सख्ती नहीं दिख पाई। वहीं स्थानीय प्रशासन का पक्ष यह रहा कि हर कार्यवाही सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक होनी चाहिए। हालांकि जनता की धारणा में यह वजहें “अपनी-अपनी कहानियां” मात्र हैं
आपको बता दें कि वर्तमान में राजहरा थाना प्रभारी अविनाश सिंह है। शहर में चर्चा है कि सिंह साहब के हाथ मजबूत हैं और इरादे पक्के। लोग कह रहे हैं कि सिंह साहब ने थाने में पहले ही साफ निर्देश दे दिए होंगे। यदि ऐसा हुआ, तो पंडर दल्ली के सटोरिए बाप बेटे के लिए हाथ में हथकड़ी लगना अब मुश्किल नहीं होगा। राजहरा के युवा और सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े लोग नए थाना प्रभारी से बड़ी आस लगाए बैठे हैं। शहर के लोग चाह रहे हैं कि पुलिस का एक्शन अब सिर्फ दिखावे का नहीं, असल काम का भी हो।
“सट्टा कारोबार किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सट्टा की हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सटोरिए के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्यवाही की जाएगी।”
अविनाश सिंह
थाना प्रभारी, राजहरा




