पुलिस विभाग में प्रशासनिक फेरबदल : आईपीएस चव्हाण किरण गंगाराम बने बालोद के नए पुलिस कप्तान, सुकमा से हुआ तबादला

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
रायपुर/बालोद। छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग द्वारा राज्य में बड़े पैमाने पर किए गए प्रशासनिक फेरबदल के तहत बालोद जिले की कमान अब भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी चव्हाण किरण गंगाराम को सौंपी गई है। 2018 बैच के तेज़तर्रार आईपीएस अधिकारी चव्हाण किरण गंगाराम को बालोद जिले का नया पुलिस अधीक्षक (एसपी) नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी की गई इस विस्तृत तबादला सूची में कुल 24 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं, जिसमें कई जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी), पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) और उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल हैं।

इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत बालोद के निवर्तमान पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल (आईपीएस) का स्थानांतरण भी कर दिया गया है। उन्हें अब सूरजपुर जिले के पुलिस अधीक्षक की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अपेक्षाएं और नई चुनौतियां
सुकमा जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे चुके आईपीएस चव्हाण किरण गंगाराम की इस नियुक्ति से बालोद जिले में सुरक्षा व्यवस्था और कानून के राज को अधिक मजबूत करने की उम्मीद है। उनके पिछले अनुभवों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि जिले में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने, जन-सामान्य से संवाद स्थापित करने (सामुदायिक पुलिसिंग), यातायात व्यवस्था में सुधार लाने और आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।



जिले के स्थानीय निवासियों ने नए पुलिस कप्तान का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और मुस्तैद होगी, जिससे आम जनता के बीच सुरक्षित और भयमुक्त माहौल का निर्माण हो सके।

नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक चव्हाण किरण गंगाराम के बारे में जानकारी
आईपीएस चव्हाण किरण गंगाराम (चव्हाण किरण कुमार गंगाराम) 2018 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। उनके कार्यकाल और पृष्ठभूमि की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
मूल निवास और शिक्षा: वे मूलतः महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री (B.E. Mechanical) हासिल की है और मराठी, हिंदी व अंग्रेजी भाषाओं के अच्छे जानकार हैं।
सुकमा में उत्कृष्ट कार्य: बालोद आने से पहले वे सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में तैनात थे। सुकमा जैसे घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने न केवल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का प्रभावी प्रबंधन किया, बल्कि अंदरूनी इलाकों में ‘पूनार नार्कोम’ (नई सुबह) जैसे अभियानों के तहत ग्रामीणों और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा दिया।
पूर्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां: सुकमा के एसपी बनने से पहले वे छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भी पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने बस्तर क्षेत्र में एडिशनल एसपी (एएसपी) और नक्सल ऑपरेशन्स के मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे उन्हें मैदानी स्तर पर काम करने का गहरा अनुभव प्राप्त है।




