हंसपुर रामनरेश हत्याकांड : रसूख पर भारी पड़ा कानून, निलंबित SDM करुण डहरिया समेत सभी आरोपियों पर हत्या के आरोप तय…

बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले की सियासत और प्रशासनिक महकमे में भूचाल लाने वाले बहुचर्चित ‘हंसपुर रामनरेश हत्याकांड’ में कानून का शिकंजा अब पूरी तरह से कस चुका है। शनिवार को प्रधान सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय (रामानुजगंज) में हुई अहम सुनवाई के बाद निलंबित एसडीएम करुण डहरिया सहित सभी आरोपियों पर हत्या, हत्या के प्रयास और साक्ष्य मिटाने जैसी गंभीर धाराओं में आरोप तय (Charge Frame) कर दिए गए हैं। बचाव पक्ष की तमाम दलीलों को दरकिनार करते हुए कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया सभी आरोप प्रमाणित होते हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले का नियमित ट्रायल शुरू होगा।
इन गंभीर धाराओं में चलेगा मुकदमा : पुलिस थाना कोरंधा द्वारा पेश की गई चार्जशीट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और एससी-एसटी एक्ट की उन धाराओं में मुकदमा चलेगा, जिनमें उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है:
- हत्या और हत्या का प्रयास: BNS की धारा 103(1)/3(5) और 115(2)/3(5)
- साक्ष्य मिटाना: धारा 238/3(5)
- सामूहिक हिंसा और गाली-गलौज: धारा 296
- एट्रोसिटी (SC-ST) एक्ट: धारा 3(1)(द), 3(1)(घ) एवं 3(2)(v)
अदालत में क्या हुआ : अभियोजन vs बचाव पक्ष –
- अभियोजन की दो टूक : लोक अभियोजक अशोक गुप्ता ने कोर्ट में पुलिस की तफ्तीश, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए जोरदार पैरवी की। अभियोजन ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि सामूहिक रूप से की गई हिंसा, जातिसूचक गालियां देने और घटना के बाद रसूख का इस्तेमाल कर सबूतों को मिटाने की गंभीर साजिश है।
- बचाव पक्ष की दलीलें हुईं खारिज : निलंबित एसडीएम करुण डहरिया के वकील ने बचाव में कलेक्टर द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट का सहारा लिया। तर्क दिया गया कि मौके पर 15-20 लोगों की भीड़ थी और झड़प के बाद खुद डहरिया ने घायलों को रात 10:30 बजे अपनी सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया था। लेकिन अदालत ने साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए इन तर्कों को फिलहाल नाकाफी माना और ट्रायल को हरी झंडी दे दी।
मामले का सबसे बड़ा ‘कानूनी पेंच’ – इस केस में एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं सबसे बड़ी बहस का मुद्दा बनने वाली हैं। पुलिस का आरोप है कि पीड़ित पक्ष अनुसूचित जाति/जनजाति से है और उनके साथ सार्वजनिक रूप से जातिगत हिंसा की गई। वहीं, अदालत में यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि मुख्य आरोपी निलंबित एसडीएम करुण डहरिया भी खुद को अनुसूचित जाति वर्ग का बता रहे हैं। ऐसे में एक ही वर्ग के होने पर SC-ST एक्ट की वैधानिकता कितनी टिकेगी, यह आगामी ट्रायल का सबसे दिलचस्प और अहम कानूनी बिंदु होगा।
अब आगे क्या?
- तीन दिन की विशेष सुनवाई: कोर्ट ने अब अभियोजन साक्ष्य के लिए अगली तारीख तय कर दी है। गवाहों के परीक्षण और सबूतों को पेश करने के लिए लगातार तीन दिनों का समय निर्धारित किया गया है।
- जिले की नजरें कोर्ट पर: एक रसूखदार प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई शुरू से ही चर्चा में है। पुलिस ने बिना दबाव में आए जांच पूरी की और चार्जशीट पेश की।
अब पूरे जिले और प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जब प्रत्यक्षदर्शी और वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के कटघरे में रखे जाएंगे, तो इस बहुचर्चित हत्याकांड का असली सच किस रूप में सामने आएगा। ट्रायल की आग अब तेज हो चुकी है।
अगले भाग में देखेंगे… और हैरान कर देने वाले खुलासे




