छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘महामुकाबला’ : कांग्रेस का सरकार पर प्रहार, 14 जुलाई को लाएगी अविश्वास प्रस्ताव…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार के लिए मानसून सत्र ‘अग्निपरीक्षा’ साबित होने वाला है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने सरकार की चूलें हिलाने की तैयारी कर ली है। रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के बंगले पर हुई कांग्रेस विधायक दल की मैराथन बैठक के बाद यह तय हो गया है कि 14 जुलाई को कांग्रेस सदन में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी।
‘सरकार विफल, जनता त्रस्त’ – कांग्रेस का वार : नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस का इस सरकार से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के वादे ‘खोखले’ साबित हुए हैं।
महंत ने कहा, “प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है, महंगाई बेतहाशा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बदतर हो चुकी है। जनता हर मोर्चे पर परेशान है, इसलिए हम इस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं।”
‘सदन से सड़क तक’ घेराबंदी – महंत ने साफ कर दिया है कि भले ही मानसून सत्र केवल 5 दिनों का है, लेकिन कांग्रेस सरकार को एक पल की भी राहत नहीं देगी। सत्र के दौरान कांग्रेस किन मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करेगी:
- बिजली संकट : अघोषित कटौती से जूझती जनता का मुद्दा।
- किसानों की बदहाली : खाद-बीज और अन्य समस्याओं पर सरकार से जवाबदेही।
- कानून-व्यवस्था : गिरती कानून-व्यवस्था पर सीधा निशाना।
‘नकटी मुद्दा’ बनेगा बड़ा हथियार – कांग्रेस ने नकटी गांव के मामले को पूरी गंभीरता से लेने का निर्णय लिया है। पार्टी ने तय किया है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाया जाएगा। महंत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस मामले पर कांग्रेस किसी भी हद तक जाने को तैयार है; सदन के भीतर पुरजोर प्रदर्शन से लेकर सड़क पर संघर्ष तक, सरकार को जवाब देना ही होगा।
विधानसभा में सवालों का ‘बम’ – इस बार का सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। विधानसभा सचिवालय के आंकड़ों के अनुसार, विधायकों ने कुल 1033 सवाल दागे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सरकार को घेरने में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी पीछे नहीं हैं, जो सरकार के लिए चिंता का सबब बन सकता है।
अविश्वास प्रस्ताव क्या है? – यह विपक्ष द्वारा सरकार के बहुमत को चुनौती देने का सबसे शक्तिशाली हथियार है। इसके जरिए सरकार की विफलता पर चर्चा होती है और अंत में मतदान के जरिए यह तय होता है कि सत्ताधारी दल के पास सदन का विश्वास बचा है या नहीं।
क्या 14 जुलाई को कांग्रेस सरकार की नींव हिला पाएगी या सत्ता पक्ष अपने संख्या बल के दम पर विपक्ष के इस ‘अविश्वास’ को खारिज कर देगा? सबकी निगाहें अब विधानसभा के पटल पर टिकी हैं।




