रायगढ़

रायगढ़ पेलमा कोल खदान : 2077 हेक्टेयर भूमि और 9 गांवों का भविष्य दांव पर, बुनियादी मांगों पर सहमति के बिना 8 जून को फिर होगी जनसुनवाई?…

रायगढ़। जिले के तमनार ब्लॉक में विकास परियोजनाओं और विस्थापितों के अधिकारों के बीच का संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 19 मई को जिस एसईसीएल (SECL) पेल्मा ओपनकास्ट कोल माइन की जनसुनवाई को ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण प्रशासन को ‘आगामी आदेश तक’ स्थगित करना पड़ा था, उसकी नई तारीख तय कर दी गई है।

​छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) के नए आदेश के अनुसार, अब इस वृहद परियोजना के लिए 8 जून 2026 को दोबारा लोक सुनवाई आयोजित की जाएगी। महज 20 दिनों के भीतर नई तारीख का ऐलान यह स्पष्ट करता है कि इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भारी दबाव है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान किया गया है?

परियोजना का आकार : 15 मिलियन टन कोयला और व्यापक विस्थापन – एसईसीएल की यह पेल्मा ओपनकास्ट खदान रायगढ़ जिले की सबसे बड़ी खुली खदानों में से एक होने जा रही है। इसके आंकड़े ही इसके प्रभाव की गंभीरता को बयान करते हैं:

  • उत्पादन का विशाल लक्ष्य : इस खदान से प्रति वर्ष 15 मिलियन टन (15 MTPA) कोयला निकालने का लक्ष्य रखा गया है।
  • जमीन का बड़ा दायरा : यह परियोजना लगभग 2077.934 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि और रिहायशी भूमि का अधिग्रहण करेगी।

निशाने पर 9 गांव : ‘एकसमान मुआवजे’ और रोजगार पर अड़े किसान – इस खदान के विस्तार से तमनार क्षेत्र के 9 गांव – पेल्मा, उरबा, मडुवाडूमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडिह, खर्रा, सक्ता और मिलूपारासीधे तौर पर प्रभावित होने जा रहे हैं।

​विगत 19 मई को जनसुनवाई के स्थगित होने का सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों का स्पष्ट और तार्किक विरोध था। तमनार बेल्ट के इन किसानों ने प्रशासन के सामने दो-टूक मांगें रखी हैं:

  • एकसमान मुआवजा दर (Equal Compensation Rate) : जमीन अधिग्रहण के दौरान गांवों के बीच कोई भेदभाव न हो। जमीन किसी भी गांव की ली जाए, सभी प्रभावितों को एक समान और न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।
  • जमीन के बदले स्थायी रोजगार : विस्थापित होने वाले परिवारों के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रोजगार की पक्की गारंटी दी जाए।

​ग्रामीण अब किसी भी तरह के ‘शॉर्टकट’ या अधूरे वादों को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते तीखे सवाल – 19 मई की स्थगित सुनवाई को इतनी जल्दी 8 जून को दोबारा निर्धारित कर देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब प्रशासन को देना होगा:

  • क्या सहमति बन गई है? क्या 8 जून की नई तारीख की घोषणा से पहले प्रशासन ने प्रभावित किसानों की ‘एकसमान मुआवजे’ वाली बुनियादी मांग पर उनके साथ कोई सार्थक संवाद या सहमति बनाई है?
  • क्या यह सिर्फ एक औपचारिकता है? क्या यह जनसुनवाई सिर्फ पुलिस बल की मौजूदगी में कागजी खानापूर्ति करने का प्रयास है, ताकि 15 मिलियन टन क्षमता वाली इस खदान का रास्ता साफ किया जा सके?

​तमनार की जनता अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक है। 8 जून को होने वाली यह ‘पब्लिक कोर्ट’ केवल एक सुनवाई नहीं होगी, बल्कि यह इस बात का लिटमस टेस्ट होगी कि हमारा सिस्टम कागजी लक्ष्यों को प्राथमिकता देता है या अपनी जनता के बुनियादी अधिकारों और भविष्य को।

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Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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