रायगढ़

रायगढ़ : औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ेगी भारी, विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई से उद्योगों में हड़कंप…

रायगढ़। जिले में औद्योगिक विकास की दौड़ में श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर निर्धारित नियमों के साथ हो रही छेड़छाड़ अब बड़ी मुसीबत बन गई है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में आक्रामकता लाते हुए सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। मई और जून 2026 के आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि विभाग अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सीधे कानूनी कार्रवाई पर जोर दे रहा है।

न्यायालय का चाबुक : दोषी उद्योगों पर भारी अर्थदंड – औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा पूर्व में दर्ज कराए गए मामलों पर श्रम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के बाद चार प्रमुख उद्योग प्रबंधनों को सुरक्षा एवं श्रमिक कानूनों के उल्लंघन का दोषी पाया गया और उन पर कुल 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अर्थदंड का विवरण इस प्रकार है:

  • जिंदल पावर लिमिटेड : 3 लाख रुपये
  • अंजनी स्टील लिमिटेड : 2.50 लाख रुपये (दो अलग-अलग मामलों में)
  • मित्तल स्टोन क्रशर : 1.50 लाख रुपये
  • एनआर इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड : 1 लाख रुपये

​यह जुर्माना केवल एक आर्थिक दंड नहीं, बल्कि उन उद्योग संचालकों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो मुनाफे की अंधी दौड़ में श्रमिकों के जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं।

मई-जून का ‘ब्लैक लिस्ट’ : कार्रवाई की जद में आए उद्योग – मई और जून 2026 में किए गए औचक निरीक्षणों के दौरान कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके चलते विभाग ने 6 नए आपराधिक प्रकरण सीधे श्रम न्यायालय में दायर किए हैं।

मई माह की कार्रवाई : मई के दौरान नियमों के उल्लंघन पर मेसर्स अग्रोहा स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड (पाली), जिंदल स्टील लिमिटेड (यूनिट-3), रायगढ़ साल्वेंट एक्सट्रेक्शन प्रा.लि., रायगढ़ इस्पात एंड पावर प्रा.लि. (यूनिट-2) और बीपी एक्टिव इंजीकॉन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए।

जून माह की कार्रवाई : जून में भी ढिलाई नहीं बरती गई। कारखाना अधिनियम-1948 और श्रमिक कल्याण से जुड़ी धाराओं का उल्लंघन करने पर शिव शक्ति स्टील लिमिटेड, श्री सांई गणेश ट्रेडिंग कंपनी और एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड पर कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

विभाग की स्पष्ट चेतावनी : “सुरक्षा से समझौता नामंजूर” – औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि श्रमिकों का स्वास्थ्य और कार्यस्थल की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा:

नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग का निरीक्षण तंत्र पूरी तरह सक्रिय है। जहां भी मानकों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां न केवल अर्थदंड लगाया जाएगा, बल्कि आपराधिक मामलों के जरिए कानूनी शिकंजा और कसा जाएगा। उद्योग प्रबंधकों को यह समझना होगा कि उत्पादन से ज्यादा जरूरी श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी है।”

आगे की राह – ​विभाग के इस सख्त रवैये से पूरे जिले के औद्योगिक जगत में हड़कंप की स्थिति है। जानकारों का मानना है कि विभाग द्वारा लगातार की जा रही यह कार्रवाई भविष्य में उद्योगों को सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) को अपग्रेड करने के लिए मजबूर करेगी। अब देखना यह होगा कि क्या इन बड़ी कंपनियों पर हुई कानूनी कार्यवाही के बाद कार्यस्थलों पर सुरक्षा का स्तर वाकई बदलता है या खानापूर्ति जारी रहती है।

​क्या आप इस मामले से जुड़ी किसी विशेष कंपनी की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट या इससे संबंधित श्रम कानूनों के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे?

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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