लोभ, आक्रोश और जीत: रायगढ़ में ‘अडानी फाउंडेशन’ के बांटे गए सामानों को ग्रामीणों ने सड़क पर फेंका, भारी विरोध के बाद प्रशासन ने घुटने टेके, जनसुनवाई स्थगित!…

रायगढ़ (छत्तीसगढ़): “जल, जंगल और जमीन” को चंद सस्ते सामानों के बदले खरीदने की कॉर्पोरेट कोशिशों को रायगढ़ के तमनार ब्लॉक के आदिवासियों ने करारा तमाचा जड़ा है। पेल्मा ओपनकास्ट कोल खदान परियोजना के लिए 19 मई 2026 को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई से ठीक एक दिन पहले, ग्रामीणों का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा।

कथित तौर पर अडानी कंपनी द्वारा ग्रामीणों को लालच देने के लिए बांटे गए कंबल, स्टील की पेटियां, छाते और स्पोर्ट्स किट को ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर फेंक दिया। महिलाओं के गगनभेदी “अडानी भगाओ” के नारों और उग्र लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला? – रायगढ़ जिले के तमनार तहसील के ग्राम पेल्मा, उरबा, लालपुर सहित कई गांवों की जमीन पेल्मा ओपनकास्ट कोल खदान (SECL/Adani) के लिए ली जानी है। इसी के तहत 19 मई को जनसुनवाई होनी थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी बेशकीमती जमीन हड़पने और जनसुनवाई में समर्थन हासिल करने के लिए, कंपनी ने गांव में प्रलोभन का खेल शुरू कर दिया था।

सड़क पर फेंका ‘लालच’ का सामान, युवाओं को गुमराह करने की थी साजिश – वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे आदिवासी महिलाएं और युवा अपने हाथों में वो सामान लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जो उन्हें बांटे गए थे। एक युवा “Adani Foundation” छपी हुई क्रिकेट जर्सी और पैंट दिखाते हुए साफ कह रहा है कि “यह युवाओं और बच्चों को गुमराह करने की साजिश है, ताकि वे अपनी जमीन के हक के लिए आवाज न उठाएं।” गुस्साई महिलाओं ने स्टील के बक्से और कंबलों को जमीन पर पटक कर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका साफ कहना है कि उन्हें भीख नहीं, अपना हक चाहिए। महुआ, तेंदूपत्ता और खेती पर निर्भर इन ग्रामीणों का सवाल है कि जमीन छिन जाने के बाद उनके बाल-बच्चे क्या खाएंगे?
कलेक्टर के नाम अल्टीमेटम: “मुआवजा नहीं, तो जनसुनवाई नहीं” – 18 मई 2026 को जनदर्शन में टोकन (नंबर- 2040326009556) लेकर लालपुर और प्रभावित गांवों के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर महोदय को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों की दो टूक मांगें :
- समान मुआवजा: जब तक सभी प्रभावित गांवों के मुआवजे का समान मूल्य स्पष्ट रूप से तय नहीं होता, कोई जनसुनवाई मान्य नहीं होगी।
- स्थायी नौकरी: पुनर्वास के तहत 2 एकड़ जमीन के बदले 1 स्थायी सरकारी नौकरी दी जाए।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में साफ चेतावनी दी थी कि बिना लिखित समझौते के यदि 19 मई को जबरन जनसुनवाई की गई, तो उग्र लोकतांत्रिक विरोध होगा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
जनता के आक्रोश के आगे झुका प्रशासन, जनसुनवाई रद्द – सड़कों पर बैठी महिलाओं के “अडानी भगाओ” के नारे और ग्रामीणों के इस अभूतपूर्व आक्रोश को देखते हुए प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में छ.ग. पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 18 मई को ही एक आपातकालीन आदेश (पत्र क्रमांक 391) जारी कर दिया।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी रायगढ़ के अनुरोध पर, 19 मई 2026 को अटल चौक, ग्राम-पेल्मा में होने वाली लोक सुनवाई को आगामी आदेश पर्यन्त तक स्थगित (Postpone) कर दिया गया है।
यह घटना इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि कॉरपोरेट की चालाकी और प्रलोभन की राजनीति अब आदिवासियों के बीच काम नहीं आने वाली है। रायगढ़ के ग्रामीणों ने बता दिया है कि उनकी जमीन कोई बिकाऊ माल नहीं है जिसे कंबल और क्रिकेट किट बांटकर खरीदा जा सके। यह ग्रामीणों की एक बड़ी जीत है, लेकिन “जल, जंगल, जमीन” को बचाने की उनकी असली लड़ाई अभी बाकी है।
(नोट: यह रिपोर्ट संलग्न वीडियो में दिख रहे दृश्यों, नारों, कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन (दिनांक 18/05/2026) और पर्यावरण संरक्षण मंडल के स्थगन आदेश के पुख्ता प्रमाणों पर आधारित है।)




