पत्थलगांव का ‘पाप’ : थाने में पुलिस की मौजूदगी में पत्रकार की पिटाई, सुशासन का दम भरती सरकार के मुंह पर तमाचा!

जशपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर का पत्थलगांव थाना आज ‘न्याय का मंदिर’ नहीं, बल्कि ‘भू-माफियाओं का अड्डा’ नजर आ रहा है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जिस वर्दी के भरोसे खुद को सुरक्षित समझता है, उसी वर्दी के साये में सत्तापोषित गुंडों ने एक पत्रकार को न केवल बेरहमी से पीटा, बल्कि कानून के इकबाल को सरेआम कुचल दिया।
वर्दी की दलाली : जब SDOP की मौजूदगी में ‘गुंडाराज’ हुआ बेनकाब – क्या पत्थलगांव के एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल का थाना अब भू-माफियाओं की निजी ‘गुंडा-फौज’ का हेडक्वार्टर बन चुका है? सवाल यह नहीं है कि गुंडों ने पत्रकार अमित पांडेय पर हाथ क्यों उठाया, सवाल यह है कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी ध्रुवेश जायसवाल की मौजूदगी में आखिर किसकी शह पर यह नंगा नाच हुआ?
अगर थाने के भीतर पुलिस के साये में पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की सुरक्षा का दावा किस मुंह से किया जा रहा है? सूत्रों की मानें तो यह महज मारपीट नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें पुलिस ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर पत्रकार को सबक सिखाने का ‘ठेका’ ले लिया था।
‘सेठों’ के आगे नतमस्तक पुलिस और सत्ता की दलाली – पत्थलगांव के तथाकथित ‘सेठों’ का साम्राज्य इतना बड़ा हो चुका है कि अब वे तय करते हैं कि कौन सी खबर चलेगी और कौन सा पत्रकार जेल जाएगा। कोयला, रेत और जमीनों के फर्जीवाड़े में लिप्त ये अपराधी आज पत्रकार से ‘लाइसेंस’ मांग रहे हैं। जिस अधिकारी (ध्रुवेश जायसवाल) का इतिहास ही दागदार रहा हो – चाहे वह बलरामपुर में पत्रकारों को फर्जी केस में फंसाने का मामला हो या सरगुजा में आदिवासियों के अधिकारों का हनन – उनसे न्याय की उम्मीद करना ही बेमानी है।
विपक्ष की ‘ट्विटर’ राजनीति: क्या ‘महाराज’ की चुप्पी रसूखदारों के आगे नतमस्तक होने का संकेत है?
इस पूरे कांड में कांग्रेस की भूमिका भी संदिग्ध है। सोशल मीडिया पर रस्म अदायगी करने वाले कांग्रेसी नेता क्या जमीन पर उतरने से डर रहे हैं? सरगुजा संभाग में इतनी बड़ी अमानवीय घटना घटती है, लेकिन पीसीसी चीफ की दौड़ में शामिल टी.एस. सिंहदेव मौन हैं। क्या ‘महाराज’ का मौन यह साबित करता है कि भू-माफियाओं का रसूख केवल सत्ता पक्ष तक सीमित नहीं, बल्कि विपक्ष की जेबों तक भी पहुंच चुका है?
जनता की ललकार: अब और नहीं! – यह हमला सिर्फ अमित पांडेय पर नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति पर है जो सच बोलने की हिम्मत करता है।
- प्रशासनिक नग्नता: क्या एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल को तत्काल निलंबित कर न्यायिक जांच नहीं होनी चाहिए?
- साजिश का पर्दाफाश: क्या पुलिस ने माफियाओं से साठगांठ कर पत्रकार को थाने बुलाकर पिटवाया?
- जवाबदेही: क्या मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपने ही जिले में पनप रहे इस माफिया-पुलिस गठजोड़ पर नकेल कसेंगे, या उनका ‘सुशासन’ सिर्फ कागजों तक सीमित है?
चेतावनी: वर्दी पहनकर अपराधियों की दलाली करने वालों, याद रखना- सच्चाई की आवाज को लाठी-डंडों से नहीं दबाया जा सकता। जनता अब मूकदर्शक नहीं रहेगी। यदि दोषियों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्थलगांव की सड़कों पर ‘जनता बनाम भ्रष्ट तंत्र’ की वह जंग छिड़ेगी, जिसमें यह रसूखदार महल ताश के पत्तों की तरह ढह जाएंगे।




