शिक्षक की ‘तानाशाही’ पर भड़का आक्रोश : छात्र को प्रताड़ित करने और धमकाने के मामले में प्रशासन को अल्टीमेटम…

तिल्दा-नेवरा: तिल्दा विकासखंड के ग्राम कोहका स्थित शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला में एक शिक्षक द्वारा कक्षा 6 के छात्र को कथित रूप से प्रताड़ित करने और डराने-धमकाने का मामला सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और कनौजिया जायसवाल समाज ने मोर्चा खोलते हुए बीईओ कार्यालय का रुख किया है।

क्या है मामला? – आरोप है कि विद्यालय के शिक्षक लक्ष्मी नारायण वर्मा ने कक्षा 6 के छात्र डेमन जायसवाल के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उसे मुंह बंद रखने की धमकी भी दी। पीड़ित छात्र के परिजनों का कहना है कि शिक्षक ने बच्चे को डराते हुए कहा कि यदि उसने घर पर कुछ बताया, तो स्कूल में उसे दोबारा प्रताड़ित किया जाएगा। इस खौफ के कारण मासूम छात्र ने स्कूल जाने से ही इनकार कर दिया है।
“बच्चों के लिए जेल बना स्कूल” – शिवसेना के प्रदेश सचिव एवं बलौदाबाजार जिला प्रभारी मनहरण साहू ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, “विद्यालय विद्या का मंदिर होता है, लेकिन यहाँ शिक्षक बच्चों के लिए डर और दहशत का पर्याय बन गए हैं।” प्रतिनिधिमंडल ने बीईओ लीलाधर (नीलाधर) सिन्हा को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि इस विद्यालय से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, जिससे बच्चों में भय का माहौल बना हुआ है।
प्रशासन को चेतावनी: कार्रवाई या आंदोलन – ज्ञापन सौंपते समय सत्येंद्र जायसवाल (प्रदेश अध्यक्ष, कनौजिया जायसवाल समाज) और रामगोपाल जायसवाल (युवा प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष) ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मामले को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगे।
- मांग: घटना की तत्काल निष्पक्ष जांच हो और दोषी शिक्षक पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- अल्टीमेटम: यदि जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की, तो शिवसेना और जायसवाल समाज चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी: इस दौरान बद्री प्रसाद वर्मा, मनोज यादव, कोमल साहू, छोटू यादव और अगेश्वर साहू सहित भारी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक पदाधिकारी उपस्थित थे।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस ‘डरावने शैक्षणिक माहौल’ को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है, या फिर मामले को दबाकर दोषियों को संरक्षण दिया जाता है।




