घरघोड़ा में खौफनाक वारदात : कैश के लिए पेट्रोल पंप संचालक का पेट फाड़ने वाले लुटेरे को 7 साल की बामशक्कत कैद!…

रायगढ़। अपराध का रास्ता चाहे कितना भी शातिराना क्यों न हो, उसका अंत सलाखों के पीछे ही होता है। रायगढ़ जिले में सरेआम गुंडागर्दी और लूट की नीयत से पेट्रोल पंप संचालक पर चाकुओं से जानलेवा हमला करने वाले खूंखार आरोपी अस्मित नाग को अदालत ने उसके अंजाम तक पहुंचा दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
वारदात के मुख्य अंश :
- अपराध: कैश से भरा बैग लूटना और विरोध करने पर चाकुओं से जानलेवा हमला।
- सजा: 7 साल की कड़ी सजा और ₹2000 का जुर्माना (IPC की धारा 458, 394 और 307 के तहत)।
- आरोपी: अस्मित नाग।
- पीड़ित: गोमती फ्यूल्स के संचालक खीरू राय।
- फैसला सुनाने वाले जज: अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा।
28 अप्रैल की वो खौफनाक रात : जब मौत बनकर आया लुटेरा – यह खौफनाक वारदात घरघोड़ा थाना क्षेत्र के कसैया स्थित गोमती फ्यूल्स पेट्रोल पंप की है। 28 अप्रैल 2024 की रात, जब घड़ियां 11 से 12 बजे के बीच का वक्त बता रही थीं और पंप के कर्मचारी राजकुमार यादव व उमेश यादव गहरी नींद में थे। पंप संचालक खीरू राय अपने कार्यालय में कंप्यूटर पर हिसाब-किताब कर रहे थे।
तभी सन्नाटे को चीरते हुए आरोपी अस्मित नाग दबे पांव दफ्तर में घुसा। उसकी नजर सीधे वहां रखे कैश से भरे बैग पर थी। उसने झपट्टा मारा और बैग लेकर भागने लगा। लेकिन संचालक खीरू राय ने भी खौफ खाने के बजाय दिलेरी दिखाई और लुटेरे का पीछा कर उसे दबोच लिया।
विरोध किया तो पेट में उतार दिया चाकू – लुटेरे को जब लगा कि वह पकड़ा जाएगा, तो उसने खौफनाक कदम उठाया। उसने अपनी जेब से धारदार चाकू निकाला और बिना किसी खौफ के खीरू राय के पेट पर ताबड़तोड़ दो वार कर दिए। खून से लथपथ खीरू राय वहीं गिर पड़े और शातिर लुटेरा अस्मित नाग रात के घने अंधेरे का फायदा उठाकर शासकीय कॉलेज की ओर फरार हो गया।
चीख-पुकार सुनकर कर्मचारी जागे और लहूलुहान मैनेजर को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें रायगढ़ जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा।
खाकी का एक्शन और अदालत का वार – इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पुलिस हरकत में आई। तत्कालीन उपनिरीक्षक करमू साय पैंकरा की टीम ने जाल बिछाकर संदेही अस्मित नाग को धर दबोचा। पुलिस की सख्त पूछताछ के आगे आरोपी ज्यादा देर टिक नहीं सका और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
न्यायालय में पुलिस की पुख्ता चार्जशीट, गवाहों के सटीक बयान और अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर की धारदार दलीलों ने आरोपी को बचने का कोई मौका नहीं दिया। अंततः अदालत ने इसे एक गंभीर और जानलेवा अपराध मानते हुए आरोपी अस्मित नाग को 7 साल की कठोर सजा और जुर्माने से दंडित कर समाज में एक कड़ा संदेश दिया है कि अपराधी चाहे जो भी हो, कानून का हथौड़ा उस पर गिरेगा जरूर!




