सिस्टम के ‘स्लो मोशन’ ने ली मासूम की सांसें : राजनांदगांव के मातृ-शिशु अस्पताल में घटिया लापरवाही, लैब टेक्निशियन पर FIR दर्ज!…

राजनांदगांव। सरकारी अस्पतालों का बदहाल ढर्रा और कर्मचारियों की खौफनाक संवेदनहीनता एक बार फिर एक नवजात के लिए ‘मौत का फरमान’ बन गई। शासकीय मातृ-शिशु अस्पताल (राजनांदगांव) में घोर लापरवाही के चलते एक अजन्मी मासूम ने मां की कोख में ही दम तोड़ दिया। मीडिया में इस गंभीर मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद नींद से जागे प्रशासन ने आखिरकार कार्रवाई का चाबुक चलाया है। सीएमएचओ (CMHO) की शिकायत पर आरोपी लैब टेक्निशियन खोमेन्द्र कुमार के खिलाफ बसंतपुर थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।

10 घंटे तक रिपोर्ट दबाकर बैठा रहा टेक्निशियन, कोख में ही बुझ गया चिराग – मिली जानकारी के अनुसार, टोलागांव निवासी 25 वर्षीय कविता मंडावी को 20 जुलाई की रात 2:30 बजे प्रसव पीड़ा के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती होते ही डॉक्टरों ने तुरंत खून जांच के लिए सैंपल ‘अटल आरोग्य लैब’ भेजा। मामला इमरजेंसी का था, सिजेरियन ऑपरेशन की दरकार थी, लेकिन लैब टेक्निशियन खोमेन्द्र कुमार मानो किसी बड़े हादसे के इंतजार में था!

लापरवाही की इंतहा देखिए : रात 2:30 बजे भेजा गया सैंपल… और जांच रिपोर्ट कब जारी की गई? अगले दिन दोपहर 12:49 बजे! यानी पूरे 10 घंटे से अधिक समय तक रिपोर्ट को दबाकर रखा गया। समय पर रिपोर्ट न मिलने से डॉक्टर समय रहते ऑपरेशन नहीं कर सके और डॉक्टरों की इस लाचारी की कीमत उस मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
परिजनों का फूट पड़ा आक्रोश: “साइन कराकर थमा दिया शव” – मासूम की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर जंग का मैदान बन गया। आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा काटा और अस्पताल स्टाफ पर संवेदनहीनता के बेहद गंभीर आरोप लगाए।
परिजनों का सीधे तौर पर कहना है :
- बच्ची के जन्म के बाद डॉक्टर उसे चुपचाप अपने साथ ले गए, लेकिन उसकी स्थिति को लेकर परिजनों को अंधेरे में रखा गया।
- करीब आधे घंटे तक कोई भी जिम्मेदार डॉक्टर या अधिकारी उनसे बात करने तक नहीं आया।
- अंत में अस्पताल स्टाफ ने सिर्फ कुछ कागजों पर जबरन दस्तखत करवाए और मासूम के बेजान शरीर को परिजनों की गोद में थमाकर अपना पल्ला झाड़ लिया!
हरकत में आया प्रशासन, अब होगी कानूनी जेल! – परिजनों के भारी विरोध और मिडिया कवरेज के बाद आखिरकार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को कड़ा कदम उठाना पड़ा। बसंतपुर थाना प्रभारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में सीएमएचओ ने स्पष्ट माना कि एचएलएल हेल्थ केयर लिमिटेड के टेक्निशियन खोमेन्द्र कुमार की आपराधिक देरी की वजह से सिजेरियन में देरी हुई और शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी टेक्निशियन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ एक टेक्निशियन पर FIR दर्ज कर देने से उस मां की गोद वापस भर जाएगी, जिसका चिराग सरकारी तंत्र की इस घटिया सुस्ती ने बुझा दिया?



