जमीन के टुकड़े पर किया था खून, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा!…

- रायगढ़ पुलिस की अचूक तफ्तीश और अभियोजन की तगड़ी पैरवी के आगे पस्त हुआ कातिल…
रायगढ़। जमीन समतलीकरण के मामूली विवाद में कुल्हाड़ी से सिर और गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर युवक की बेरहमी से हत्या करने वाले दरिंदे को अदालत ने उसकी सही जगह पहुंचा दिया है।
षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश श्री अश्वनी कुमार चतुर्वेदी की अदालत ने चर्चित नवापाली हत्याकांड के मुख्य आरोपी हरिलाल खड़िया (30 वर्ष) को धारा 302 IPC के तहत आजीवन सश्रम कारावास (सख्त उम्रकैद) और अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़ित परिवार के दर्द पर मरहम लगाते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ शासन की ओर से ₹1,00,000 की क्षतिपूर्ति देने की भी बड़ी अनुशंसा की है।
क्या थी खूनी वारदात? – घटना 28 जनवरी 2024 की है। चक्रधरनगर के ग्राम नवापाली मेन रोड पर विशाल सिंह ठाकुर अपनी जमीन पर मिट्टी डलवाकर सफाई करवा रहा था। तभी अचानक जमीन पाटने की रंजिश को लेकर मांझापारा निवासी आरोपी हरिलाल खड़िया वहां पहुंच गया। विवाद इतना बढ़ा कि वहशी बने हरिलाल ने अपने पास रखी कुल्हाड़ी उठाई और विशाल के सिर-गर्दन पर एक के बाद एक कई जानलेवा वार कर दिए। विशाल की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई।
पुलिस का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और साइंटिफिक तफ्तीश – वारदात के बाद पुलिस एक्शन मोड में आई। तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक प्रशांत राव आहेर ने केस की कमान संभाली:
- 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी : पुलिस ने ताबड़तोड़ घेराबंदी कर 29 जनवरी को ही कातिल को धर दबोचा।
- हथियार और खून से सने कपड़े बरामद : आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी और खून से लथपथ कपड़े जब्त किए गए।
- पक्की FSL रिपोर्ट : फॉरेंसिक जांच की अचूक रिपोर्ट ने कातिल के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए।
कोर्ट में 20 गवाहों का प्रहार, अपर लोक अभियोजक ने तोड़ा आरोपी का चक्रव्यूह – अदालत के कटघरे में अपर लोक अभियोजक तन्मय बनर्जी ने पुलिस द्वारा जुटाए गए मजबूत वैज्ञानिक और भौतिक साक्ष्यों को इतनी बेजोड़ रणनीति के साथ पेश किया कि बचाव पक्ष की हर दलील धराशायी हो गई। 20 चश्मदीद और महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों ने कातिल का गुनाह पूरी तरह साबित कर दिया, जिसके बाद अदालत ने आरोपी को फांसी जैसी कठोर परिस्थितियों के समकक्ष ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे भेजने का फरमान सुना दिया।
रायगढ़ पुलिस का कड़ा संदेश : “अपराध कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथ उससे लंबे हैं। वैज्ञानिक विवेचना और मजबूत पैरवी से हर अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।”




