बिलासपुर में ‘खाकी’ दागदार: “5 हजार में 3 को थोड़ी न छोडूंगा…” थाने में लगी बोली, घूसखोर हेड कांस्टेबल सस्पेंड…

बिलासपुर। रक्षक जब भक्षक बन जाएं और न्याय का मंदिर कहा जाने वाला थाना ही ‘सौदेबाजी का अड्डा’ बन जाए, तो आम आदमी न्याय की गुहार लगाने आखिर कहां जाए? बिलासपुर के सरकंडा थाने से खाकी को शर्मसार कर देने वाला एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक हेड कांस्टेबल ने जमानत योग्य मामले में भी आरोपियों को जेल भेजने का खौफ दिखाकर सरेआम 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग ली।
वीडियो के वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, जिसके बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने कड़ा एक्शन लेते हुए भ्रष्ट हेड कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
“तीन-तीन आदमी हैं, 10 हजार करवा दो…” – कानून के इस ‘तथाकथित’ रक्षक का नाम शोभित कैवर्त्य है, जो सरकंडा थाने में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात था। वायरल वीडियो में इस घूसखोर पुलिसवाले की बेशर्मी साफ देखी और सुनी जा सकती है। सौदेबाजी करते हुए वह बेखौफ होकर कहता है- “तीन-तीन आदमी को 5 हजार रुपए में थोड़ी न छोडूंगा। तीनों के लिए 10 हजार रुपए करवा दो।”
सूत्रों की मानें तो ‘डील’ पक्की होने के बाद इस भ्रष्ट मुलाजिम ने 10 हजार रुपये की यह काली कमाई अपनी जेब में डाल भी ली थी।
कानून का खौफ दिखाकर खुलेआम ‘वसूली’ : जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला एक साधारण मारपीट से जुड़ा है। कानूनन ऐसे जमानती मामलों में आरोपियों को थाने से ही जमानत देकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन हेड कांस्टेबल शोभित कैवर्त्य ने इस छोटे से मामले को अपनी ‘काली कमाई’ का जरिया बना लिया। उसने आरोपियों को पकड़ा, थाने में बैठाया और फिर उन पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर सीधे जेल भेजने की दहशत फैला दी। इसी खौफ का फायदा उठाकर उसने पैसों की डिमांड रख दी।
SSP का हंटर चला, पुलिस लाइन अटैच : यह वीडियो लगभग 2 महीने पुराना बताया जा रहा है, लेकिन जैसे ही यह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और पुलिस के आला अधिकारियों की टेबल तक पहुंचा, तो तुरंत एक्शन लिया गया।
SSP रजनेश सिंह की सख्त कार्रवाई:
- घूसखोर हेड कांस्टेबल शोभित कैवर्त्य को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
- सस्पेंशन के साथ ही उसे थाने से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है।
- मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
बड़ा सवाल : इस मामले ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या थानों में बैठकर खुलेआम ‘रेट कार्ड’ तय किए जा रहे हैं? अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच के बाद इस भ्रष्ट हेड कांस्टेबल पर क्या और भी कोई बड़ी और कड़ी गाज गिरती है या फिर कुछ समय बाद यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




