महा-खुलासा : हंसपुर रामनरेश हत्याकांड में रसूखदारों का ‘डर्टी गेम’! पूर्व एसडीएम को बचाने के लिए गवाहों को ‘बिक जाओ या उठवा लिए जाओगे’ की खुली धमकी…

बलरामपुर। जिले के कुसमी क्षेत्र (ग्राम हंसपुर) का बहुचर्चित रामनरेश हत्याकांड एक बार फिर सुलग उठा है। सत्ता, रसूख और खौफ के कॉकटेल ने इस मामले में न्याय की धज्जियां उड़ाने की खौफनाक पटकथा लिख दी है। आरोप है कि हत्या के मुख्य आरोपी तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया और उनके बाहुबली साथियों को कानूनी फंदे से बचाने के लिए अब गवाहों की जान की बोली लगाई जा रही है।
“बिक जाओ… या उठवा लिए जाओगे!” – यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि उन गवाहों को दी जा रही दहशत भरी धमकी है, जिनकी आंखों के सामने 15 फरवरी 2026 की काली रात को रामनरेश को लाठी-डंडों और लोहे के रॉड से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया था। प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ित आकाश कुमार व अजीत राम उरांव ने पुलिस अधीक्षक (SP) बलरामपुर के दरबार में पहुंचकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
पीड़ित आकाश कुमार ने कैमरे के सामने और अपनी लिखित शिकायत में खौफनाक सच उगलते हुए बताया कि आरोपी पक्ष के गुर्गे, शोयब अंसारी और जाबीर अंसारी खुलेआम कानून को ठेंगा दिखाते हुए उसे धमका रहे हैं। बस में सफर के दौरान उसे रोककर रुपयों का भारी-भरकम लालच दिया गया। जब वह नहीं बिका, तो 22 मई 2026 की दोपहर ये गुर्गे सीधे उसके घर धमक पड़े। घर पर आकाश के न मिलने पर उसके पिता को धमकाते हुए साफ लहजे में कहा गया- “पैसे लेकर एसडीएम वाले केस में बयान बदल दो, नहीं तो तुम लोगों के साथ कुछ भी किया जा सकता है, कोई भी तुम्हें उठाकर ले जा सकता है!”
सिस्टम का कालिख भरा चेहरा : कोरे कागजों पर लिए गए हस्ताक्षर – इस पूरे मामले का सबसे स्याह और शर्मनाक पहलू तो सिस्टम की उस प्रशासनिक गुंडागर्दी का है, जिसने न्याय की उम्मीदों की ही भ्रूण हत्या करने का प्रयास किया। एसपी को दी गई शिकायत में इस बात का पर्दाफाश किया गया है कि घटना के बाद गवाहों को एसडीएम कार्यालय कुसमी बुलाया गया। वहां बिना कोई आधिकारिक बयान दर्ज किए, दबाव डालकर जबरन ‘सादे और कोरे कागजों’ पर उनके दस्तखत ले लिए गए। यह सीधा-सीधा सत्ता के दुरुपयोग और सबूतों में फर्जीवाड़ा कर एक सोची-समझी आपराधिक साजिश रचने की ओर इशारा करता है।
क्या रसूख के आगे घुटने टेक देगा कानून? – गौरतलब है कि इस मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी) रामानुजगंज द्वारा पूर्व एसडीएम करुण डहरिया और अन्य आरोपियों पर हत्या (103(1)), हत्या के प्रयास, साक्ष्य छिपाने और एससी-एसटी एक्ट की अति-गंभीर धाराओं में आरोप तय किए जा चुके हैं। लेकिन, अब गवाहों की जान पर मंडराता खतरा चीख-चीख कर सवाल पूछ रहा है कि क्या रसूखदार आरोपी अपने धनबल और बाहुबल से न्याय को खरीद लेंगे?
पीड़ित परिवार ने एसपी से गुहार लगाते हुए खौफ जाहिर किया है कि अगर उन्हें सुरक्षा नहीं मिली, तो आरोपी किसी भी अनहोनी को अंजाम दे सकते हैं। उन्होंने धमकीबाजों पर तत्काल एफआईआर और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह है कि बलरामपुर पुलिस इन खौफनाक मंसूबों को कुचलकर गवाहों को सुरक्षा देती है, या फिर न्याय की देवी एक बार फिर रसूखदारों के आगे अपनी आंखें मूंद लेगी!




