यूनिटी मार्च या यूनिफॉर्म मार्च? -12 किलोमीटर की पदयात्रा में एकता की गूंज, पर सवालों की पदचाप भी!…

रायगढ़, 12 नवम्बर 2025। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आज रायगढ़ में भव्य “यूनिटी मार्च” निकला – पर इसके साथ कई विरोधाभासी दृश्य भी नज़र आए। एक ओर “एक भारत श्रेष्ठ भारत” और “राष्ट्रीय एकता” के नारे गूंजते रहे, तो दूसरी ओर स्कूलों में पढ़ाई ठप रही, परीक्षा स्थगित हुई, और छोटे बच्चों की छुट्टी का “सरकारी आदेश” जारी हो गया।
घरघोड़ा से तमनार तक 12 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा सरकारी तामझाम और स्कूली परेड जैसी दिखी। सुबह 7:45 बजे से शाम 4:00 बजे तक छात्रों की “उपस्थिति” तय थी – चाहे मन से हों या आदेश से। वहीं किंडरगार्टन और प्राथमिक वर्ग के बच्चे घर पर छुट्टी मनाते रहे, क्योंकि स्कूल बंद रहे। शिक्षा विभाग की यह ‘एकता यात्रा’ इस बार किताबों की जगह झंडों के साथ निकली।

कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी, सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह समेत जिले के तमाम जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मंच से एकता के भाषण गूंजे, पर ज़मीनी सवाल यह उठा कि क्या सरकारी “मार्च” अब सरकारी “मार्किंग” का नया तरीका बन गया है?
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों ने सरदार पटेल के योगदान को नाटक, नृत्य और नारों के ज़रिए जीवंत किया। “नशे से दूर रहो”, “एक भारत श्रेष्ठ भारत”, “फिर एक बदलाव करें” जैसी तख्तियों के बीच बच्चे पसीना बहाते दिखे, जबकि कई अध्यापक और अधिकारी “सेल्फी सेशन” में व्यस्त थे।
मार्च गायत्री मंदिर से शुरू होकर जयस्तंभ चौक, कारगिल चौक, स्वामी आत्मानंद स्कूल और देवगढ़ मार्ग होते हुए तमनार पहुंचा – रास्ते भर पुलिस, प्रशासन और मीडिया की चौकस निगाहें रहीं। भीड़ में “एकता” से ज़्यादा “औपचारिकता” नज़र आई, और ‘राष्ट्रीय एकता’ की जगह ‘प्रशासनिक एकरूपता’ दिखी।
पदयात्रा के समापन पर मंच से एकता, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के सपने दोहराए गए। लेकिन जिले के कई स्कूली अभिभावकों ने सवाल उठाया – “क्या यह एकता बच्चों के पसीने से मापी जाएगी? क्या पढ़ाई और परीक्षा अब ‘सरकारी कार्यक्रमों’ की बलि चढ़ेंगी?”
दरअसल, ST. ANN’S HIGH SCHOOL सहित जिले के कई स्कूलों ने इस सरकारी आयोजन के चलते कक्षाएं बंद कर दीं और परीक्षा 21 नवंबर तक टाल दी। यह सरकारी एकता की नई परिभाषा बनती दिखी “जहाँ आदेश, वहाँ सहभागिता।”
अंतत : देश को एकता की जरूरत है, लेकिन अगर यह “अनिवार्य उपस्थिति” के आदेश पर तय होगी, तो सवाल यह भी रहेगा –
- क्या यह ‘यूनिटी मार्च’ था या ‘यूनिफॉर्म मार्च’?
- क्या बच्चे देशभक्ति सीख रहे हैं या अनुशासन के नाम पर दिखावे की परेड?
एकता पर सवाल उठाना देशद्रोह नहीं होता – कभी-कभी यह भी सच्ची देशभक्ति होती है। 🇮🇳✍️
नोट – मामले को लेकर ज़ब हमने BEO घरघोड़ा (संतोष कुमार सिंह ) से फ़ोन के माध्यम से सम्पर्क करना चाहा तो उनका फ़ोन न उठाना अपने -आपमें गंभीर सवाल पैदा करता है??…




