महाघोटाला : घरघोड़ा जनपद पंचायत में RTI से फूटा भ्रष्टाचार का बम, प्रचार-प्रसार के 7 लाख ‘तेल’ में फूंक डाले!

- कार्यालयीन व्यय की राशि को फर्जी वाहन बिलों के सहारे ठिकाने लगाने का आरोप…
- पैसा मिला 2024 में, बिल लगा दिए 2023 के; अधिकारियों की वित्तीय बाजीगरी देख हर कोई हैरान…
- कागजों पर ग्रामीणों को घुमा दिया बिलासपुर, हकीकत में गाड़ियां चलीं ही नहीं?…
रायगढ़। जिले के घरघोड़ा जनपद पंचायत की आवास शाखा एक बार फिर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के दलदल में धंसती नजर आ रही है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निकले दस्तावेजों ने एक ऐसे तगड़े खेल का भंडाफोड़ किया है, जिसने प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। आरोप है कि सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन खर्च के लिए आए लगभग 7 लाख रुपये की पूरी की पूरी रकम को अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर ‘वाहन व्यय’ के नाम पर डकार लिया।

मोटरसाइकिल और ‘छोटा हाथी’ से उड़ाए लाखों रुपये – RTI से मिले दस्तावेज़ों के मुताबिक, आवास शाखा को आवंटित बजट को ठिकाने लगाने के लिए बकायदा एक स्क्रिप्ट लिखी गई। सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए मोटरसाइकिल, पिकअप और ‘छोटा हाथी’ (टाटा एस) जैसे छोटे-बड़े वाहनों के धड़ाधड़ बिल लगाए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रचार-प्रसार और दफ्तर के कामों की आड़ में इन वाहनों का अंधाधुंध खर्च दिखाकर पूरी राशि का भुगतान भी ले लिया गया।
अधिकारियों की ‘टाइम ट्रैवल’ बाजीगरी: 2024 का पैसा, 2023 का बिल! -इस पूरे कथित घोटाले में अधिकारियों की लापरवाही और वित्तीय धोखाधड़ी का सबसे मजेदार और पुख्ता सबूत समय का हेरफेर है। आवास शाखा को इस राशि का आवंटन साल 2024 में प्राप्त होता है, लेकिन साहब लोगों ने जो खर्च के बिल फाइल में दबाए हैं, वे साल 2023 के हैं! यानी बजट आने से एक साल पहले ही खर्च कर दिया गया? इस ‘टाइम ट्रैवल’ वाली जादूगरी ने खुद ही साबित कर दिया है कि यह पूरा मामला सिर्फ और सिर्फ फर्जीवाड़े की बुनियाद पर टिका है।
कागजों पर बिलासपुर की सैर, जमीन पर सब ‘गायब’ – दस्तावेजों में यह सफेद झूठ भी दर्ज किया गया है कि इन वाहनों के जरिए ग्रामीणों को किसी कार्य के सिलसिले में बिलासपुर ले जाया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत खंगालने पर पता चला कि न तो कोई ग्रामीण बिलासपुर गया और न ही ऐसे किसी वाहन का वास्तव में उपयोग हुआ। सूत्रों का साफ कहना है कि फर्जी और संदिग्ध बिलों को तैयार कर सरकारी धन का खुलेआम बंदरबांट किया गया है।
जनता की मांग : निष्पक्ष जांच हो, जेल जाएं दोषी – इस खुलासे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों में भारी आक्रोश है। जनता सीधे तौर पर जिला प्रशासन से सवाल पूछ रही है:
”अगर सरकार का पैसा सुरक्षित नहीं है, तो जिम्मेदार कुर्सियों पर क्यों बैठे हैं? इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वाहन मालिकों, संबंधित ग्रामीणों के बयानों और भुगतान के रिकॉर्ड का बारीकी से मिलान किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।”
कटघरे में जिला प्रशासन : क्या होगी कार्रवाई? – सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए मिलने वाले फंड का इस कदर दुरुपयोग सीधे तौर पर एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रायगढ़ जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के आला अधिकारी इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर मौन साधे रहेंगे, या फिर भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजेंगे? जनता की नजरें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।




