रायगढ़

शिक्षा के मंदिर में ‘मधुशाला’ का मंजर: लैलूंगा में नशेड़ी गुरुजी के भरोसे नौनिहालों का भविष्य!…

रायगढ़। जहाँ बच्चों को संस्कार और ज्ञान की दीक्षा मिलनी चाहिए, वहाँ शराब की दुर्गंध और लापरवाही का तांडव मचा है। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला छातासराई से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो पूरी शिक्षा व्यवस्था के गाल पर तमाचा है। यहाँ पदस्थ सहायक शिक्षक कुष्टो राम भोय पर आरोप है कि वे ज्ञान के इस मंदिर को अपनी ‘मधुशाला’ बना चुके हैं।

नशे की लत में चूर, भविष्य से दूर – खबर है कि शिक्षक महोदय अक्सर नशे की हालत में डगमगाते हुए स्कूल पहुँचते हैं। आलम यह है कि जिस हाथ में कलम और किताब होनी चाहिए, वे नशे के कारण बच्चों को पढ़ाने की सुध तक खो चुके हैं। स्कूल में क्लास नहीं, बल्कि लापरवाही का ‘पाठ’ पढ़ाया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप है, जिससे अभिभावकों में भारी आक्रोश है।

ग्रामीणों ने खोला मोर्चा : “अब बर्दाश्त नहीं” – शिक्षक की इस अनुशासनहीनता से तंग आकर ग्रामीणों और शाला प्रबंधन समिति का सब्र अब टूट चुका है। बार-बार दी गई समझाइश जब बेअसर रही, तो ग्रामीणों ने एक स्वर में संकुल समन्वयक को लिखित पंचनामा सौंपा है।

पंचनामे के मुख्य बिंदु :

  • ​शिक्षक का नशे की हालत में स्कूल आना।
  • ​बिना किसी सूचना के लगातार अनुपस्थित रहना।
  • ​बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ और विद्यालय के माहौल को दूषित करना।

क्या होगा एक्शन या सिर्फ आश्वासन? – यह मामला न केवल एक शिक्षक की लापरवाही है, बल्कि प्रशासन की निगरानी पर भी बड़ा सवाल है। क्या शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेंगे? क्या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ऐसे शिक्षक पर निलंबन या सख्त कार्रवाई होगी, या फिर कागजी खानापूर्ति कर फाइल बंद कर दी जाएगी?

“हमें शिक्षक चाहिए, पियक्कड़ नहीं। अगर बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं है, तो ऐसे स्कूल और शिक्षक का क्या फायदा? प्रशासन तत्काल सख्त कदम उठाए।” – आक्रोशित ग्रामीण एवं अभिभावक

अब देखना यह है कि रायगढ़ जिला प्रशासन इस ‘शिक्षा के दुश्मन’ पर क्या चाबुक चलाता है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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