CIMS बिलासपुर बदहाली मामला: कागजी दावों पर ‘हाईकोर्ट’ का वज्रपात; चीफ जस्टिस बोले- “AI से तैयार लगता है सरकारी हलफनामा, कागजों से नहीं बदलती जमीनी हकीकत”…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) की बदहाली, बदइंतजामी और वेंटिलेटर पर आ चुकी बुनियादी सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव द्वारा पेश किए गए शपथ पत्र (हलफनामे) को सिरे से खारिज करते हुए बेहद तीखी और चुभती हुई टिप्पणियां की हैं।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सचिव के हलफनामे पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट रूम में कहा कि दस्तावेज को देखकर ऐसा लगता है जैसे इसे जमीनी हकीकत जाने बिना AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से ‘कट-कॉपी-पेस्ट’ करके तैयार किया गया है। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि चमचमाते कागजों और व्यवस्थित रूप से लिखे गए वाक्यों से अस्पताल की बदतर जमीनी हकीकत को छुपाया नहीं जा सकता।
‘AI’ वाला हलफनामा : चीफ जस्टिस ने क्यों जताई नाराजगी? – सुनवाई के दौरान जब स्वास्थ्य सचिव का शपथ पत्र कोर्ट के सामने आया, तो चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा भड़क गए। अदालत ने पाया कि शपथ पत्र के कई हिस्सों में एक ही तरह की तकनीकी और प्रशासनिक बातें बार-बार दोहराई गई थीं।
अदालत ने तीखे लहजे में कहा :
”शपथ पत्र देखने में बहुत साफ-सुथरा, सुंदर और व्यवस्थित है, लेकिन क्या इससे CIMS की जमीनी हकीकत बदल जाएगी? अगर अस्पताल में सब कुछ इतना ही ठीक और दुरुस्त होता, तो यह मामला हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंचता ही नहीं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को अदालत के सामने असली और वास्तविक स्थिति रखनी चाहिए, न कि भ्रामक दस्तावेजों के जरिए कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश करनी चाहिए।”
दिलचस्प बात यह है कि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों ने भी पहले ही यह आशंका जता दी थी कि विभाग द्वारा पेश किए जा रहे जवाब और आंकड़े इंसानी दिमाग से कम और AI टूल से ज्यादा तैयार किए हुए लग रहे हैं, जिनमें सच्चाई का अंश बेहद कम है।
मानसून की पहली बारिश में खुली पोल : छत से रिसाव, फायर सिस्टम भी बंद – हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नरों द्वारा मार्च और अप्रैल महीने में किए गए CIMS के औचक निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के ‘ऑल इज वेल’ के दावों के परखच्चे उड़ा दिए।
वार्डों में भरा पानी, बेहाल मरीज – रिपोर्ट में बताया गया कि CIMS की मुख्य इमारतों में पानी के रिसाव (सीपेज) की बेहद गंभीर समस्या है। स्थिति इतनी विकट है कि अभी दो दिन पहले हुई बारिश के बाद अस्पताल के कई संवेदनशील हिस्सों और वार्डों की छत से पानी टपकने लगा और देखते ही देखते वहां पानी भर गया। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को टपकती छतों के नीचे और फैले हुए पानी के बीच इलाज कराने को मजबूर होना पड़ा।
बंद पड़ा था फायर फाइटिंग सिस्टम – अस्पताल में भर्ती सैकड़ों मरीजों की जान को ताक पर रखकर CIMS का फायर फाइटिंग (आग बुझाने वाला) सिस्टम लंबे समय से बंद पड़ा हुआ था। किसी बड़े हादसे की स्थिति में मरीजों को रेस्क्यू करने का कोई साधन काम नहीं कर रहा था। अदालत की खिंचाई के बाद शासन की ओर से बचाव में कहा गया कि 15 जून 2026 को फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के लिए कार्य आदेश (Work Order) जारी कर दिया गया है और वर्तमान में काम तेजी से चल रहा है।
31 एडवांस्ड मशीनों की खरीदी का सच : CGMSC का स्टेटस चार्ट – मामले में चौतरफा घिरने के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने भी हाईकोर्ट में एक विस्तृत चार्ट और स्टेटस रिपोर्ट पेश की। CGMSC के अनुसार, CIMS में स्वास्थ्य सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए कुल 31 आधुनिक और एडवांस्ड मशीनों की खरीदी की प्रक्रिया चल रही है।
अदालत में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार मशीनों की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है :
- 13 मशीनें अस्पताल पहुँचीं : कुल स्वीकृत मशीनों में से 13 अत्याधुनिक उपकरण CIMS पहुंच चुके हैं, जिन्हें इंस्टॉल किया जा रहा है।
- 02 मशीनों का परचेज ऑर्डर : दो महत्वपूर्ण मशीनों के लिए जून महीने में ही परचेज ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं।
- महंगी मशीनों पर मंजूरी का इंतजार : दो मशीनों की कीमत बजट से अधिक होने के कारण फाइल को CIMS प्रबंधन के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का दावा है कि एक-दो दिन में मंजूरी मिलते ही इनके लिए भी ऑर्डर जारी हो जाएगा।
- 02 मशीनें ‘टेक्निकल डेमो’ में : दो मशीनें अभी तकनीकी परीक्षण के दौर से गुजर रही हैं। विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण पूरा होने के बाद इनकी फाइनेंशियल बिड (वित्तीय निविदा) खोली जाएगी।
- 02 मशीनों का मूल्यांकन जारी : इन दो मशीनों का टेंडर जून में खुला था, जिनकी तकनीकी स्क्रूटनी और मूल्यांकन का काम वर्तमान में चल रहा है।
- 06 मशीनों की बिड 9 जुलाई को : शेष बची 6 महत्वपूर्ण मशीनों के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसकी बिड आगामी 9 जुलाई को खोली जाएगी।
“जुर्माना लगाना मकसद नहीं, सुधार चाहिए”: हाईकोर्ट की मानवीय टिप्पणी – हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका (PIL) के जरिए उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या विभाग के खिलाफ केवल दंडात्मक कार्रवाई करना या जुर्माना ठोकना नहीं है। कोर्ट का एकमात्र और मुख्य उद्देश्य बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल CIMS की व्यवस्थाओं में आमूलचूल सुधार करना है, ताकि गरीब मरीजों को भटकना न पड़े।
न्यायालय ने भावुक और कड़े शब्दों में कहा :
”केवल कागजों में बड़े-बड़े दावे करने और आंकड़ों का मायाजाल बुनने से जनता का भला नहीं होगा। जब दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसी गरीब और जरूरतमंद मरीज को समय पर वेंटिलेटर मिलेगा, चालू हालत में मशीनें मिलेंगी और डॉक्टरों द्वारा बेहतर इलाज मिलेगा… और जब वह ठीक होकर अपने घर जाएगा, तब वह दिल से दुआ देगा। असली सफलता उस दुआ में है, कागजी हलफनामों में नहीं।”
कोर्ट कमिश्नरों को ‘फ्री हैंड’ – हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह सरकार के दावों को बिना जांचे सच नहीं मानेगी। अदालत ने कोर्ट कमिश्नरों को ‘फ्री हैंड’ देते हुए निर्देश दिया है कि वे जब चाहें, जिस वक्त चाहें, बिना किसी पूर्व सूचना के (Surprise Visit) CIMS अस्पताल जा सकते हैं और सरकार द्वारा कागजों पर किए गए दावों की जमीनी हकीकत का ऑन-द-स्पॉट वेरिफिकेशन कर सकते हैं।
संपादकीय टिप्पणी : हाईकोर्ट के इस सख्त रुख ने यह साफ कर दिया है कि अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ‘एसी कमरों’ वाली कार्यशैली नहीं चलेगी। जब तक CIMS की छत से पानी टपकना बंद नहीं होता और हर मशीन सुचारू रूप से काम नहीं करती, तब तक स्वास्थ्य विभाग की गर्दन कानून के शिकंजे में कसी रहेगी। अब देखना यह है कि 9 जुलाई को होने वाली अगली प्रक्रियाओं और कोर्ट कमिश्नरों के आगामी दौरों में CIMS की क्या तस्वीर निकलकर सामने आती है।



