आसमां से बरसी आफत, सिस्टम से मिला धोखा; भारी बारिश के बीच रायगढ़ SP दफ्तर के पास गाँधी प्रतिमा के निचे धरने पर बैठे सहारा के पीड़ित निवेशक!…

रायगढ़। अपनी ही गाढ़ी कमाई को वापस पाने के लिए जनता को किस हद तक प्रताड़ित होना पड़ता है, इसका जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण आज रायगढ़ में देखने को मिला। एक तरफ आसमान से मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरस रही थी, तो दूसरी तरफ सहारा इंडिया के ठगे जा चुके पीड़ित निवेशक न्याय की भीख मांगने के लिए जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय के पास गाँधी प्रतिमा के निचे कुर्सियां डालकर धरने पर बैठ गए।
भीगते बदन और आंखों में आंसुओं के साथ पीड़ितों ने सिस्टम की निकम्मेपन के खिलाफ जो हुंकार भरी है, उसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
‘लूट ली गई गरीबों की पाई-पाई, रसूखदार खा रहे मलाई’ – वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे कड़कड़ाती बारिश और गीली जमीनों के बीच बुजुर्ग और मध्यमवर्गीय पीड़ित न्याय की गुहार लगा रहे हैं। धरने पर बैठे पीड़ितों ने चीख-चीखकर ‘सहारा इंडिया हाय-हाय’ और ‘अपराधी पुलिस वाले हाय-हाय’ के नारे लगाए।
उनका सीधा आरोप है कि सहारा के रसूखदार अधिकारी उनकी खून-पसीने की कमाई डकार कर ऐश कर रहे हैं और रक्षक बनी पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है। पीड़ितों ने आक्रोश में कहा :
”लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय निवेशकों का पैसा डूबा हुआ है। लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं, शादियां रुक गई हैं, इलाज के पैसे नहीं हैं, लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है! आज हम अपनी ही रकम की वापसी के लिए इस मूसलाधार बारिश में भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर हैं।”
तहसीलदार को थमाया ‘अल्टीमेटम’ वाला 5 सूत्रीय ज्ञापन – भीषण बारिश के बीच अपनी मांगों पर अड़े निवेशकों ने आखिरकार तहसीलदार को श्रीमान जिलाध्यक्ष के नाम एक बेहद सख्त 5 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है।

- 22 फरार कप्तानों की तत्काल गिरफ्तारी : सहारा इंडिया के 22 फरार आरोपी मैनेजर्स को पुलिस फौरन घसीटकर सलाखों के पीछे डाले।
- प्रशासनिक मिलीभगत पर केस दर्ज हो : आरोपी मैनेजर ओमप्रकाश शर्मा और उनकी पत्नी रश्मि शर्मा के फ्रीज खातों को ‘अवैध’ रूप से अनफ्रीज करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
- प्रॉपर्टी जब्त कर हो नीलामी : सभी फरार आरोपियों की संपत्तियों को चिह्नित कर उन्हें कुर्क करने के लिए केस कलेक्टर न्यायालय भेजा जाए।
- किराए की रिकवरी : ओमप्रकाश शर्मा की जो संपत्तियां कुर्क हो चुकी हैं, उनसे आ रहा पूरा किराया सीधे कलेक्टर न्यायालय में जमा कराया जाए।
- सभी मैनेजर्स पर एक समान हंटर : बचे हुए अन्य सभी आरोपी मैनेजर्स की संपत्तियों को भी कुर्क करने की फाइल तुरंत आगे बढ़ाई जाए।
“अब आर-पार होगा, चुप नहीं बैठेंगे” – इस आंदोलन का नेतृत्व रविशंकर दुबे, कैलाश अग्रवाल, धरनीधर बाजपेई और नरेश कंकरवाल जैसे कई पीड़ित कर रहे हैं, जिनके हस्ताक्षर इस जंग की गवाही दे रहे हैं। पीड़ितों ने साफ कर दिया है कि यह बारिश तो सिर्फ एक शुरुआत है, अगर प्रशासन ने उनकी जमा पूंजी वापस नहीं दिलाई और फरार ठगों को गिरफ्तार नहीं किया, तो यह गुस्सा पूरे जिले को हिलाकर रख देगा।
सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक सफेदपोश ठगों के आगे बेबस जनता यूं ही सड़कों पर भीगती और रोती रहेगी? प्रशासन अब भी जागेगा या इस चीख को भी अनसुना कर देगा?




