‘सुल्तान नहीं हो जो जनता गुलाम बन जाए!’… बॉम्बे हाई कोर्ट का मुंबई पुलिस पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार!…

मुंबई। “पुलिस कोई मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की घरेलू नौकर नहीं है, वह जनता की सेवक है!”— बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस के अहंकार को तार-तार करते हुए एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने देश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला दिया है।
जस्टिस माधव जामदार ने सरकार के इशारे पर नाचने वाले अधिकारियों को न सिर्फ सरेआम लताड़ा, बल्कि साफ कह दिया कि यह लोकतंत्र है, यहाँ नागरिकों को गुलाम समझने की भूल न की जाए!
‘मुर्दाबाद’ के नारों पर तड़ीपार? कोर्ट भड़का! – मामला SDPI के महासचिव सईद अहमद का था, जिन्होंने CAA और ज्ञानवापी जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’ और ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ के नारों को आधार बनाकर 1 साल के लिए शहर से ‘तड़ीपार’ (देश निकाला) करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया था।
इस पर जस्टिस जामदार ने पुलिस की धज्जियां उड़ाते हुए पूछा :
”विरोध करना इस देश के नागरिकों का पैदाइशी और संवैधानिक अधिकार है! अगर किसी ने सरकार या अमित शाह के खिलाफ नारे लगा दिए, तो क्या इसके लिए उसे तड़ीपार कर दोगे? यह तानाशाही नहीं तो क्या है?”
पेपर लीक का मुद्दा उठाकर घेरा – जस्टिस जामदार यहीं नहीं रुके, उन्होंने देश के सबसे संवेदनशील मुद्दे पर चोट करते हुए कहा : “आज देश में धड़ाधड़ पेपर लीक हो रहे हैं, युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। अगर इसके खिलाफ जनता सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी, तो क्या पुलिस उन सब पर केस ठोक देगी? क्या नागरिकों से उनका विरोध करने का हक भी छीन लिया जाएगा?”
“महाराष्ट्र में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ चालू है, तुम भी वॉशिंग मशीन में धुल जाओ!” – सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति पर सबसे तीखा और सीधा कटाक्ष किया। दो दिन पहले मुंबई में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक मासूम की मौत का जिक्र करते हुए उन्होंने पाला बदलने वाले नेताओं को आड़े हाथों लिया।
याचिकाकर्ता सईद अहमद की तरफ देखते हुए जज साहब ने सरेआम तंज कसा :
- “पूरे महाराष्ट्र में इस समय ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का नाच चल रहा है।”
- “तुम्हारे (सईद) खिलाफ कुछ FIR ही तो हैं? तुम भी साइड बदलने (पार्टी बदलने) के बारे में क्यों नहीं सोचते? वहां तो ‘वॉशिंग मशीन’ तैयार बैठी है, सारे दाग धुल जाएंगे!”
पुलिस पर भारी जुर्माना, तड़ीपार का ऑर्डर रद्दी की टोकरी में! – बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस और प्रशासन के ‘तड़ीपार’ करने वाले दोनों आदेशों को असंवैधानिक बताते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त (रद्द) कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सम्मान से जीना और अपनी आवाज उठाना संविधान की आत्मा है।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि अपनी सीमाओं को लांघने वाले पुलिस अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, ताकि आगे से खाकी किसी राजनीतिक आका की गुलामी करने से पहले सौ बार सोचे!




