बड़ा एक्शन : सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ पड़ी भारी, रिसाली के पार्षद विनय नेताम की कुर्सी छिनी…

दुर्ग। जनप्रतिनिधि अगर गुंडागर्दी और तोड़फोड़ पर उतर आएं, तो कानून अपना काम कैसे करता है, इसका जीता-जागता उदाहरण दुर्ग जिले के रिसाली नगर पालिक निगम में देखने को मिला है। सरकारी कार्यालय में घुसकर उत्पात मचाने और पद का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोपों में वार्ड 16 (बीआरपी कॉलोनी) के पार्षद विनय नेताम पर बर्खास्तगी की गाज गिरी है।
संभागायुक्त (कमिश्नर) एसएन राठौर ने 29 मई को एक बेहद कड़ा आदेश पारित करते हुए विनय नेताम को पार्षद पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह कार्रवाई सत्ता और पद के नशे में कानून हाथ में लेने वालों के लिए एक तगड़ा सबक है।
मामले के मुख्य बिंदु :
- गंभीर आरोप : निगम मुख्यालय परिसर में संचालित ‘आधार कक्ष’ में जबरन प्रवेश कर तोड़फोड़ करना और शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना।
- शिकायतकर्ता : रिसाली नगर पालिक निगम के आयुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 मार्च को एक विस्तृत और पुख्ता रिपोर्ट (प्रतिवेदन) प्रस्तुत की थी।
- कार्रवाई का आधार : जांच में पदीय दायित्वों का घोर उल्लंघन और निष्ठापूर्वक काम न करना पूरी तरह से प्रमाणित पाया गया।
कैसे छिनी कुर्सी? साक्ष्यों के आगे नहीं टिके तर्क – निगम आयुक्त की सख्त शिकायत के बाद इस मामले की बाकायदा गहन सुनवाई हुई। इस दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया, लेकिन जब साक्ष्यों, तर्कों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच हुई, तो पार्षद विनय नेताम के कृत्य पूरी तरह से गैर-कानूनी और पद की गरिमा के खिलाफ पाए गए।
दस्तावेजों ने चीख-चीख कर गवाही दी कि जिस व्यक्ति को जनता ने अपनी सहूलियत के लिए चुना था, उसी ने निगम के भीतर घुसकर आम जनता से जुड़े काम (आधार कक्ष) को बाधित किया और संपत्ति तहस-नहस की।
प्रशासन का दो-टूक संदेश – प्रमाणित आरोपों और विधिक तथ्यों की कसौटी पर कसने के बाद संभागायुक्त द्वारा लिया गया यह अंतिम फैसला सिर्फ एक पार्षद की बर्खास्तगी तक सीमित नहीं है। यह उन तमाम जनप्रतिनिधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो यह मान बैठते हैं कि पद मिलने के बाद वे प्रशासन से ऊपर हो गए हैं। इस आदेश ने साफ कर दिया है कि गुंडागर्दी, अनुशासनहीनता और सरकारी संपत्ति का नुकसान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




