रायगढ़

लैलूंगा में बड़ा खेला : सूत्रों के हवाले से 2.50 लाख में बिकीं विधायक? विधानसभा से वापस लिया ध्यानाकर्षण!…

ब्रेकिंग न्यूज़ | लैलूंगा, छत्तीसगढ़:

लैलूंगा की राजनीति में इस वक्त भूचाल आ गया है! सूत्रों के हवाले से एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आ रही है कि लैलूंगा में एक बहुत “बड़ा खेला” हो गया है। पंचायत स्तर पर हुए बड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई गई आवाज को कथित तौर पर चंद रुपयों की खनक ने दबा दिया है। खबर है कि 2.50 लाख रुपये के लेन-देन के बाद एक अहम ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को वापस ले लिया गया है!

​आखिर यह ध्यानाकर्षण प्रस्ताव था क्या, जिसे दबाने के लिए इतना बड़ा दांव खेला गया? आइए आपको बताते हैं इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी, जो विधानसभा के दस्तावेजों में दर्ज है:

क्या था वह मुद्दा जिसे दबाने की हुई कोशिश? –  छत्तीसगढ़ विधानसभा में सदस्य श्रीमती विद्यावती सिदार द्वारा 23/02/2026 को सचिव को एक ध्यानाकर्षण सूचना प्रेषित की गई थी। इस सूचना के माध्यम से 22/02/2026 को उप मुख्यमंत्री (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) का ध्यान एक बेहद अविलम्बनीय और सार्वजनिक महत्व के विषय की ओर आकर्षित किया जाना था।

​यह पूरा मामला रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत लैलूंगा में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी (मनरेगा) योजना से जुड़ा हुआ है।

घोटाले और लापरवाही के मुख्य बिंदु :

  • बरसों से अटका पैसा : लैलूंगा अंतर्गत वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक स्वीकृत मनरेगा कार्यों में प्रयुक्त सामग्री का भुगतान मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सी.ई.ओ.) की लापरवाही के कारण 3 से 4 वर्षों से लंबित है।
  • गुणवत्ता विहीन कार्य : मनरेगा से स्वीकृत निर्माण कार्य पूर्ण तो हो गए हैं, परन्तु वे गुणवत्ता विहीन और तकनीकी मापदण्ड के अनुरूप नहीं हैं।
  • इन पंचायतों में हुआ खेल :
    • ​ग्राम पंचायत आमापाली में शेड एवं पक्की नाली निर्माण।
    • ​ग्राम पंचायत हीरापुर में पशुशेड निर्माण।
    • ​ग्राम पंचायत मोहनपुर में कुआ निर्माण कार्य।
    • ​ग्राम पंचायत केराबहार में सिंचाई नाली निर्माण।
    • ​ग्राम पंचायत जाम बहार में डायवर्सन चेनल निर्माण कार्य।
    • ​ग्राम पंचायत करवाजोर में कुआ निर्माण कार्य।
  • अधिकारियों की मनमानी : कार्यक्रम अधिकारी द्वारा पूर्ण कार्यो का एफ.टी.ओ. (FTO) सबमिट किया जा चुका है, परन्तु मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एफ.टी.ओ. नहीं किया गया है जिससे आज दिनांक तक भुगतान लंबित है।
  • सरपंचों का उत्पीड़न : भुगतान न होने के परिणामस्वरूप सामग्री आपूर्तिकर्ताओं द्वारा ग्राम पंचायतों के सरपंचो को प्रताड़ित किया जा रहा है।
  • शासन के आदेशों की धज्जियां : प्रमुख सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पत्र (दिनांक 21.01.2026) के अनुसार वित्तीय वर्ष समाप्ति के पूर्व प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाना था, लेकिन जनपद सी.ओ. द्वारा इसे रोका जाना न्याय संगत नहीं है। इससे सुशासन पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है और शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।

सवाल जो अब उठ रहे हैं…जब मामला इतना गंभीर था, सरपंच प्रताड़ित हो रहे थे और शासन के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं, तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ? सूत्रों की मानें तो भ्रष्ट तंत्र ने खुद को बचाने के लिए 2.50 लाख रुपये की “सुपारी” देकर इस मुद्दे को ही विधानसभा से गायब करवा दिया।

​क्या सचमुच विधायक 2.50 लाख में बिक गईं? क्या लैलूंगा के सरपंचों और मजदूरों को उनका हक कभी मिल पाएगा, या ‘बड़े खेले’ के तहत अधिकारियों की तिजोरियां ऐसे ही भरती रहेंगी? यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब अब जनता मांग रही है!

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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