शहर में अवैध कब्जों का अंबार — नगर पालिका नींद में, जनता उदास

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/राजहरा। जिले के दल्ली राजहरा नगर पालिका परिषद के समक्ष व्यापक भ्रष्टाचार और उदासीनता के बीच शहर में अवैध कब्जों ने विकराल रूप ले लिया है। पुराने कार्यकाल की छूट और वर्तमान राजस्व अमले की कथित रिश्वतखोरी ने सड़कों, गलियों व नालियों पर अतिक्रमण को बढ़ावा दिया है; दर्ज शिकायतें डिब्बों में दबकर रह गईं। वार्डवासियों ने सुनियोजित अतिक्रमण, नक्शा-पेपर में छेड़छाड़ और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी पर गहरी नाराजगी जताई है, जबकि नगर पालिका नेतृत्व अपेक्षित कार्यवाही करने में नाकाम दिख रहा है।

मानो, शहर में नगर पालिका परिषद द्वारा अवैध कब्जाधारियों को खुली छूट दे दी गई है। जहां देखो वहां लोग अपने निजी फायदे के लिए अतिक्रमण कर आम नागरिकों को परेशानी में झोंक रहे हैं। नागरिकों द्वारा बार बार आवेदन, निवेदन और हड़ताल के बाद भी नगर पालिका के जिम्मेदारों के “कान में जूं तक नहीं रेंगती” है।

नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा के पिछले कांग्रेस कार्यकाल में शहर में अवैध कब्जों की बाढ़ सी आ गई थी। नगर पालिका से जुड़े ज्यादातर जनप्रतिनिधियों ने शहर में जगह जगह बड़े बड़े भूभाग पर अवैध कब्जा कर अतिक्रमण को गुप चुप तरीके से सरकारी दस्तावेज बना डाला है। वही शहर के संभ्रांत नागरिकों ने उम्मीद जताई थी कि नई परिषद के जिम्मेदार उन अवैध कब्जों को “सुशासन” की कार्यवाही बता “बुलडोजर एक्शन” लेंगे। लेकिन हद तो तब हो गई कि इस बार तो अवैध कब्जे का कीर्तिमान रचने की भरसक तैयारी चल रही है। वही गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नगर पालिका परिषद का राजस्व अमला लिफाफे में “महात्मा गांधी की फोटो छपे कागज” की पेशगी लेकर जमीन के कागजों और मानचित्र को ही बदल देते है कि इस गड़बड़झाले के कारण गड़ा हुआ मुर्दा भी घबराकर उठ खड़ा हो जाता है।

आपको बता दें कि वार्ड क्रमांक 04 के वार्डवासियों राजेश तिवारी, रेड्डी भैय्या, तिहारू राम, गुरतेज सिंग, मनीषा तथा सुखचैन सिंग ने बताया कि वार्ड में ही पहले से ही एक काफी संकरी गली है यहां पैदल चलना भी दुश्वार है। वहां एक महिला ईश्वरी बाई ने अपने आशियाने के निर्माण के लिए पहले तो एक फिट कॉलम सकरी गली में ही बढ़ा लिया। ऊपर से इसी सकरी गली में तीन सीढ़ियां और फिसलपट्टी तक बना डाली। आप इससे अंदाजा लगा सकते है कि नगर पालिका का राजस्व अमला कितने गहरे भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है जो भ्रष्टाचार व रिश्वत की फिसलपट्टी पर लगातार नीचे की ओर घसरता ही जा रहा है। कई दबी फाइले और शिकायत पत्र नपा के कूड़े के डिब्बे में पान की पीक और गुटखे की थूक के नीचे दबे हुए है।
शहर के नागरिकों ने बदलाव की गहरी उम्मीद लिए पिछली कांग्रेस की नपा टीम को बाहर का रास्ता दिखाया और सुशासन वाली सरकार का सपना संजो कर भाजपा को बहुमत दिया। लेकिन वही पुरानी यादें जो पीछा ही नहीं छोड़ रही। भाजपा की टिकिट पर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के जिम्मेदारी वाले पद पर सुशोभित हुए तोरण साहू भी अवैध कब्जों पर चुप्पी साधे हुए है। शहर में चर्चा आम है कि इनके राज में अतिक्रमण में नंबर वन बनने की होड मची हुई है। शहर के लालची अतिक्रमणकारी सड़कों, गलियों और नालियों पर भी अवैध कब्जा कर जगह घेरने में लगे है।




