सिस्टम की भेंट चढ़ी एक और जान: ‘कातिल’ इंजेक्शन ने 10 मिनट में लील ली जिंदगी! वाड्रफनगर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की घोर लापरवाही से कोहराम…

बलरामपुर। क्या अस्पताल अब जिंदगी बचाने के बजाय मौत बांटने के अड्डे बन गए हैं? बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर सिविल अस्पताल से आई एक खौफनाक घटना ने पूरे स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां इलाज कराने आई एक महिला को डॉक्टरों की कथित ‘घोर लापरवाही’ ने मौत की नींद सुला दिया। परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल के एक ‘गलत इंजेक्शन’ ने महज 10 मिनट के भीतर हंसती-खेलती महिला की सांसें छीन लीं।
इलाज के नाम पर ‘मौत का फरमान’ – अस्पताल, जहां लोग जीवन की आस लेकर जाते हैं, वहीं वाड्रफनगर सिविल अस्पताल में इस महिला के लिए यह सफर आखिरी साबित हुआ। परिजनों के मुताबिक, महिला को इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। आंखों के सामने मरीज तड़प रहा था, लेकिन आरोप है कि ‘सफेद कोट’ पहने धरती के भगवान और अस्पताल का स्टाफ तमाशबीन बना रहा।
“अगर समय रहते डॉक्टरों ने सही इलाज और निगरानी दी होती, तो आज हमारी मरीज जिंदा होती।” – रोते-बिलखते और आक्रोशित परिजनों का बयान।
10 मिनट में उखड़ गईं सांसें, फूटा भारी आक्रोश – इंजेक्शन लगने के बाद महज 10 मिनट का वो खौफनाक मंजर, जिसमें तड़पते हुए महिला ने दम तोड़ दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद अस्पताल में कोहराम मच गया। परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा। देखते ही देखते अस्पताल परिसर भारी हंगामे और तनाव का अखाड़ा बन गया। लोगों का एक ही सवाल था— आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन?
पुलिस के साये में अस्पताल, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया – अस्पताल में बवाल बढ़ते देख बैकफुट पर आए प्रबंधन ने आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और हालात पर काबू पाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अब सारा दारोमदार उस पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जो इस ‘संदिग्ध मौत’ के पीछे के असली सच से पर्दा उठाएगी।
सिस्टम से उठते सुलगते सवाल :
- क्या इंजेक्शन गलत था? महिला की जान लेने वाला वो इंजेक्शन क्या था और बिना जांचे-परखे क्यों लगाया गया?
- इमरजेंसी में डॉक्टर कहां थे? जब मरीज तड़प रही थी, तब उसे तुरंत आईसीयू या आपातकालीन जीवन रक्षक सहायता क्यों नहीं दी गई?
- कब तय होगी जिम्मेदारी? क्या इस मामले को भी जांच के नाम पर फाइलों में दबा दिया जाएगा, या दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होगा?
वाड्रफनगर की इस घटना ने इलाके की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। परिजन अब दोषियों पर सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कोई कठोर कदम उठाता है या फिर यह घटना भी सिस्टम की संवेदनहीनता की भेंट चढ़ जाएगी।




