कलेक्टर का कड़ा रुख : 74 राइस मिलर्स पर गिरेगी गाज, ‘ब्लैक लिस्ट’ करने के साथ FIR की तैयारी!…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने में कोताही बरतने वाले राइस मिलर्स के खिलाफ प्रशासन ने अब “सर्जिकल स्ट्राइक” की तैयारी कर ली है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के सख्त तेवर के बाद अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने स्पष्ट कर दिया है कि शासन की डेडलाइन 30 अप्रैल के बाद कोई रियायत नहीं मिलेगी।
अल्टीमेटम : जेल और ब्लैक लिस्टिंग का खतरा – समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासन ने रायपुर जिले के 74 डिफॉल्टर राइस मिलर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर हड़कंप मचा दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में चावल जमा नहीं हुआ तो:
- मिलर्स को ब्लैक लिस्ट (काली सूची) में डाल दिया जाएगा।
- उनका पंजीयन क्रमांक (Registration ID) ब्लॉक कर दिया जाएगा।
- सक्षम न्यायालय में अभियोजन (Prosecution) की कार्रवाई शुरू होगी।
रडार पर ‘टॉप 10’ डिफॉल्टर्स : होगी FIR – अपर कलेक्टर ने उन 10 राइस मिलों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं, जिनका बकाया सबसे ज्यादा है। इन मिलों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) तत्काल किया जाएगा। यदि सत्यापन के दौरान मिल में धान कम पाया गया, तो इसे अमानत में खयानत माना जाएगा और संबंधित मिलर के विरुद्ध सीधे FIR दर्ज कराई जाएगी।
“अनुबंध के बाद भी चावल जमा न करना ‘छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016’ और ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ के तहत दंडनीय अपराध है। कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
कीर्तिमान सिंह राठौर, अपर कलेक्टर
1 मई से बैंक गारंटी होगी ‘कैश’ – प्रशासन ने आर्थिक चाबुक चलाने की तैयारी भी कर ली है। जिला विपणन अधिकारी को दो-टूक निर्देश दिए गए हैं कि:
- 30 अप्रैल 2026 तक हर हाल में चावल की डिलीवरी सुनिश्चित हो।
- जो मिलर्स फेल होंगे, 01 मई 2026 से उनकी बैंक गारंटी (BG) से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
अधिकारियों को सख्त निर्देश : बैठक में जिला खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा सहित विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की इस आक्रामक रणनीति से उन मिलर्स में खलबली मच गई है जो अब तक धान का उठाव करने के बाद चावल जमा करने में ढिलाई बरत रहे थे।
बॉटम लाइन : प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी धान का हिसाब अब इंच-इंच और दाने-दाने से लिया जाएगा। लापरवाही का मतलब अब भारी जुर्माना और सलाखें हैं।




