छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा सियासी सरेंडर: 3 साल बाद शिकंजे में रामगोपाल अग्रवाल, खुलेंगे 3,600 करोड़ के ‘काले राज’!…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में शामिल रहे प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के पूर्व कोषाध्यक्ष और कद्दावर नेता रामगोपाल अग्रवाल ने आखिरकार 3 साल की लंबी और रहस्यमयी फरारी के बाद कानून के आगे घुटने टेक दिए हैं। बुधवार को रामगोपाल अग्रवाल अचानक रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के दफ्तर पहुंचे और वहां आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया।
EOW की टीम ने उन्हें तत्काल प्रभाव से हिरासत में ले लिया है। बंद कमरे में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उनसे मैराथन पूछताछ का दौर शुरू हो चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल राज्य के तीन सबसे चर्चित और रसूखदार सिंडिकेट घोटालों—₹3,200 करोड़ का शराब घोटाला, ₹540 करोड़ का कोल लेवी (कोयला परिवहन) घोटाला, और ₹127 करोड़ का कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला – में मुख्य सूत्रधार, सिंडिकेट के नीति-निर्धारक और अवैध वित्तीय लेन-देन के सबसे बड़े ‘ब्लैक बॉक्स’ रहे हैं।
सबसे बड़ी कड़ियां : ज़ब्त डायरी, ‘कांग्रेस भवन’ कनेक्शन और करोड़ों की एंट्री – जांच एजेंसियों (ED और EOW) द्वारा अब तक जुटाए गए सबूतों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक ताकत के संरक्षण में अवैध कमाई और राजनीतिक फंडिंग का एक ऐसा अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया गया था, जिसका केंद्र बिंदु रामगोपाल अग्रवाल को माना जा रहा है:
- सूर्यकांत तिवारी की ‘सीक्रेट डायरी’ से खुला राज : कोल लेवी घोटाले के मुख्य सरगना और किंगपिन सूर्यकांत तिवारी के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों के हाथ एक डायरी लगी थी। इस डायरी के पन्नों में ‘कांग्रेस भवन’ और संगठन से जुड़े कुछ शीर्ष पदों के नाम पर करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की सिलसिलेवार और स्पष्ट एंट्री दर्ज मिली थी।
- EOW का संगीन दावा : जांच एजेंसी का सीधा और आधिकारिक आरोप है कि यह करोड़ों रुपये की काली कमाई रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से ही राजनीतिक गलियारों और ‘कांग्रेस भवन’ तक पहुंचाई गई थी। शराब घोटाले के मुख्य सिंडिकेट लीडर अनवर ढेबर और कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपी रोशन चंद्राकर ने अवैध रूप से वसूली गई राशि का एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे अग्रवाल को सौंपा था, ताकि उसे सिस्टम में खपाया जा सके।
- बेटे वैभव अग्रवाल पर शिकंजा : रामगोपाल अग्रवाल के अचानक सरेंडर करने की पृष्ठभूमि पहले ही तैयार हो चुकी थी। सरेंडर से ठीक दो दिन पहले EOW ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की थी। दो दिनों तक चली इस लंबी पूछताछ में जांच अधिकारियों ने वैभव से रामगोपाल अग्रवाल के पिछले 3 सालों के अज्ञात ठिकानों, उनके गुप्त आर्थिक लेन-देन, देश-विदेश (जैसे दुबई और अन्य सुरक्षित ठिकाने) की यात्राओं और इस दौरान उन्हें संरक्षण देने वाले कथित नेटवर्क के बारे में कई महत्वपूर्ण राज उगलवाए, जिसके बाद रामगोपाल अग्रवाल के पास सरेंडर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
तीन महाघोटालों का पूरा गणित : ₹3,600 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार – रामगोपाल अग्रवाल का नाम छत्तीसगढ़ के जिन तीन बड़े सिंडिकेट घोटालों की जांच में मुख्य आरोपी, नीति-निर्धारक और अंतिम लाभार्थी (Beneficiary) के रूप में दर्ज है, उनका पूरा ब्योरा इस प्रकार है:
कथित शराब घोटाला (अनुमानित ₹3,200 करोड़)
- घोटाले का तरीका: साल 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में सरकारी आबकारी व्यवस्था के समानांतर एक पूरी तरह से अवैध सिंडिकेट (सरकारी डिस्टिलरी से लेकर दुकानों तक) चलाया गया। नियमों को ताक पर रखकर, बिना आबकारी ड्यूटी चुकाए (Unaccounted) अवैध रूप से शराब बेची गई। नकली होलोग्राम बनाए गए और कैश में उगाही कर सीधे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये की चपत लगाई गई।
- अग्रवाल का लिंक: जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस सिंडिकेट से होने वाली अवैध कमाई और कमीशन का एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक संरक्षण और चुनावी फंडिंग के रूप में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचता था।
कोल लेवी वसूली घोटाला (अनुमानित ₹540 करोड़)
- घोटाले का तरीका: साल 2020 से 2022 के बीच राज्य में कोयला परिवहन (Coal Transportation) और खनन से जुड़े कारोबारियों पर एक अवैध ‘टैक्स’ यानी कोल लेवी थोपी गई थी। इसके तहत अधिकारियों और बिचौलियों के सिंडिकेट ने कोयला ले जाने वाली गाड़ियों से प्रति टन ₹25 की दर से अवैध रूप से जबरन वसूली की। जो कारोबारी यह राशि नहीं देता था, उसे प्रशासनिक स्तर पर एनओसी (NOC) और ट्रांजिट पास जारी नहीं किए जाते थे।
- गठजोड़: इस मामले में राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी, बिचौलिए, राजनेता और कोयला कारोबारी पहले से ही जेल में हैं। अग्रवाल पर इस वसूली की राशि को रूट (Route) करने का आरोप है।
कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला (अनुमानित ₹127 करोड़)
- घोटाले का तरीका: यह मामला धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली सरकारी प्रोत्साहन राशि में भारी भ्रष्टाचार से जुड़ा है। वर्ष 2015 से 2023 के बीच प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और उसके भुगतान की आड़ में नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया। चुनिंदा राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिकारियों ने मिलकर आम राइस मिलर्स से प्रति क्विंटल मोटी कमीशनखोरी की और सरकार को ₹127 करोड़ का चूना लगाया।
राजनीतिक भूचाल और आगे की राह: अब क्या होगा? – पिछले 3 सालों से रामगोपाल अग्रवाल के अचानक लापता होने और किसी भी सार्वजनिक मंच पर न आने के कारण राजनीतिक गलियारों में यह चर्चाएं आम थीं कि वे देश छोड़कर दुबई या किसी अन्य सुरक्षित विदेशी ठिकाने पर शरण लिए हुए हैं। जांच एजेंसियां उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर उनकी लोकेशन खंगालने में जुटी हुई थीं।
अग्रवाल के इस अचानक आत्मसमर्पण के बाद अब EOW ज़ब्त दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल चैट्स, हवाला नेटवर्क और सीक्रेट डायरी की एंट्रीज को सामने रखकर निम्नलिखित बिंदुओं पर कड़ाई से पूछताछ कर रही है:
- मुख्य लाभार्थी कौन? सिंडिकेट के जरिए जुटाया गया अवैध पैसा असल में किन-किन बड़े सफेदपोश नेताओं, मंत्रियों और ब्यूरोक्रेट्स तक पहुंचाया गया?
- फरारी का मददगार कौन? पिछले 3 सालों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल को किन लोगों ने शरण दी, उनकी यात्राओं का खर्च किसने उठाया और उनका वित्तीय नेटवर्क कौन संचालित कर रहा था?
- पैसे का इस्तेमाल कहां हुआ? चुनावी फंडिंग, बेनामी संपत्तियों की खरीद और विदेशों में धन भेजने (Money Laundering) में इस अवैध पैसे का इस्तेमाल किस तरह किया गया?
राजनीतिक और कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि रामगोपाल अग्रवाल का आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बड़े ‘पंडोरा बॉक्स’ को खोल सकता है। अग्रवाल के बयानों और उनके द्वारा किए जाने वाले खुलासों के आधार पर आने वाले दिनों में कई और रसूखदार चेहरों, पूर्व मंत्रियों और बड़े अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। हालांकि, इन सभी गंभीर मामलों की गहन जांच और अदालती सुनवाई अभी जारी है, और किसी भी आरोप की अंतिम न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।




