सूरजपुर में अवैध खनन का खूनी खेल : लांची गांव में सरकारी जमीन पर गिट्टी निकालते वक्त ढहा पहाड़, दो सगे दोस्त जिंदा दफन…

सूरजपुर: जिले के कोतवाली थाना अंतर्गत आने वाले लांची गांव में रविवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। सरकारी जमीन पर चल रहे अवैध खनन और गिट्टी निकालने के जानलेवा खेल ने दो 18 वर्षीय मासूम युवकों को असमय ही मौत की नींद सुला दिया। रविवार दोपहर करीब 12 बजे जब दोनों युवक चट्टान के नीचे खुदाई कर रहे थे, तभी एक भारी-भरकम पत्थर भरभराकर उनके ऊपर गिर गया। मलबे का वजन और दबाव इतना ज्यादा था कि दोनों युवकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे वहीं जिंदा दफन हो गए।
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे लांची गांव में मातम पसरा हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
असमय बुझ गए दो घरों के चिराग – इस दर्दनाक हादसे ने दो पिताओं की बुढ़ापे की लाठी को हमेशा के लिए छीन लिया। मृतकों की पहचान बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले दो आदिवासी युवकों के रूप में हुई है:
- बाबू लाल (18 वर्ष) – पिता: धनेश्वर सिंह गोड़, निवासी: लांची
- जय पाल (18 वर्ष) – पिता: जय सिंह गोड़, निवासी: लांची
दोनों आपस में गहरे दोस्त थे और अक्सर गांव के आसपास मजदूरी या छोटे-मोटे कामों में साथ रहा करते थे। रविवार की सुबह भी दोनों भविष्य के कुछ सपने लेकर घर से निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनका आखिरी सफर साबित होगा।
प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी : “हमने मना किया था, पर काल खींच ले गया” – घटनास्थल पर मौजूद और सबसे पहले पहुंचने वाले ग्रामीणों ने बताया कि रविवार की सुबह दोनों युवक शासकीय भूमि पर स्थित एक पहाड़ी नुमा हिस्से के पास गिट्टी (पत्थर) निकालने गए थे।
एक चश्मदीद ग्रामीण ने रोते हुए बताया :
”हमने दोपहर के वक्त दोनों युवकों को उस खतरनाक ढलान की तरफ जाते देखा था। हमने उन्हें आवाज देकर टोका भी और वहां जाने से मना किया क्योंकि वह हिस्सा काफी कमजोर दिख रहा था। उन्होंने पलटकर कहा कि ‘हम बस थोड़ी देर में लौट रहे हैं’, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद एक भयानक गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी। जब हम दौड़कर मौके पर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर हमारी रूह कांप गई। मिट्टी और विशाल पत्थर धंस चुके थे और दोनों का कहीं अता-पता नहीं था।”
ग्रामीणों ने तुरंत अपने स्तर पर फावड़े और कुदाल लेकर पत्थर हटाने की कोशिश शुरू की, लेकिन पत्थर इतना भारी था कि उसे बिना मशीनों के हटाना नामुमकिन था। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।
भाई की रुलाई : “पता ही नहीं चला भाई कब घर से निकला…” – मृतक बाबू लाल के बड़े भाई ज्वाला प्रसाद इस हादसे के बाद से सदमे में हैं। उन्होंने बताया, “रविवार का दिन था। सुबह भाई घर पर ही था। दोपहर को खाना खाने के बाद मैं खुद अपने काम पर निकलने की तैयारी कर रहा था। मुझे भनक तक नहीं लगी कि बाबू लाल कब और किसके साथ बाहर चला गया। जब मैं घर से निकलने ही वाला था, तभी गांव के एक लड़के ने भागते हुए आकर बताया कि पहाड़ी धंस गई है और बाबू लाल उसके नीचे दब गया है। मैं पागलों की तरह भागा, लेकिन तब तक सब खत्म हो चुका था।”
पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक जांच – हादसे की खबर मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और भारी मशक्कत के बाद मलबे को हटाकर दोनों युवकों के शवों को बाहर निकाला। जब तक उन्हें मलबे से खींचा गया, तब तक उनकी सांसें पूरी तरह थम चुकी थीं। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
अधिकारियों के बयान : जांच की आंच में आएगा ‘अवैध खनन’ का नेटवर्क – इस हादसे ने एक बार फिर जिले में शासकीय जमीनों पर होने वाले अवैध उत्खनन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह खनन केवल इन युवकों द्वारा निजी स्तर पर किया जा रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा गिट्टी-माफिया सक्रिय है।
“दोनों मृतक लांची गांव के ही निवासी थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वे सुबह पत्थर की खुदाई करने गए थे, इसी दौरान चट्टान का एक हिस्सा धंस गया और वे दोनों उसकी चपेट में आ गए। ग्रामीणों के सहयोग से शवों को बरामद कर लिया गया है। शासकीय भूमि पर यह खनन किस उद्देश्य से और किसके शह पर किया जा रहा था, यह पूरी तरह से जांच का विषय है।”
सूर्यकांत साय (तहसीलदार, सूरजपुर)
“शासकीय जमीन पर दोनों ग्रामीण गिट्टी निकाल रहे थे, तभी यह बड़ा हादसा हुआ। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर केस दर्ज कर लिया है। हादसे के कारणों की विस्तृत विवेचना की जा रही है। जांच के दौरान जो भी तथ्य और लापरवाही सामने आएगी, उस आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
अभिषेक पैंकरा (SDOP, सूरजपुर)
सवाल : मौत के इस खेल का जिम्मेदार कौन? – इस हादसे ने सूरजपुर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई तीखे सवाल दाग दिए हैं:
- शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से हो रहे इस अवैध खनन की भनक स्थानीय पटवारी या राजस्व अमले को क्यों नहीं थी?
- क्या इन 18 साल के युवकों को किसी ठेकेदार या माफिया द्वारा चंद रुपयों का लालच देकर इस खतरनाक काम में धकेला गया था?
- अगर प्रशासन समय रहते इन अवैध खदानों और उत्खनन स्थलों को प्रतिबंधित कर देता, तो क्या आज इन दो परिवारों के चिराग बुझने से नहीं बच जाते?
फिलहाल पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, लेकिन इस हादसे ने लांची गांव को ऐसा जख्म दिया है जो लंबे समय तक नहीं भरेगा।




