जशपुर

पत्थलगांव में अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, कलेक्टर कार्यालय के सख्त आदेश के बाद हड़कंप!…

भाग 2

जशपुर। शासकीय सेवाओं में अनुकंपा नियुक्ति का सपना देखने वाले हजारों योग्य और ईमानदार बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ किस तरह ‘जुगाड़’ और ‘फर्जीवाड़े’ का खेल खेला जाता है, इसका एक ताजा और सनसनीखेज उदाहरण जशपुर जिले से सामने आया है। इस गंभीर प्रकरण ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, जहां एक अपात्र व्यक्ति द्वारा तथ्यों को पूरी तरह छुपाकर और फर्जी शपथ पत्र (हलफनामा) के बल पर शासकीय नौकरी हथिया लिए जाने का बड़ा मामला उजागर हुआ है।

क्या है पूरा मामला और किस तरह रचा गया षड्यंत्र? – पत्थलगांव निवासी सतर्क नागरिक श्री अजीत गुप्ता द्वारा जिला कलेक्टर कार्यालय जशपुर में दिनांक 09/07/2026 को पुख्ता दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में मुख्य रूप से निम्न बिंदु उठाए गए हैं :

  • तथ्यों का छिपाया जाना : रविंदर निषाद (निवासी पत्थलगांव) द्वारा मृत शासकीय सेवक के आश्रित के रूप में अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की गई, जबकि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के स्पष्ट नियमों के अनुसार यदि परिवार का कोई अन्य सदस्य पूर्व से शासकीय सेवा (जैसे प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के रूप में) में कार्यरत हो, तो नियुक्ति की पात्रता बिल्कुल नहीं होती।
  • फर्जी शपथ पत्र (हलफनामा) : आरोप है कि रविंदर निषाद ने नोटरी के समक्ष प्रस्तुत अपने शपथ पत्र में जानबूझकर यह असत्य और भ्रामक कथन दर्ज कराया कि उनके परिवार में कोई भी सदस्य शासकीय सेवा में कार्यरत नहीं है, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत थी।
  • सीधी धोखाधड़ी : शासन को गुमराह कर, कूटरचना (Forgery) के सहारे सरकारी पद और धन का दुरुपयोग करते हुए अवैध रूप से यह नियुक्ति हासिल की गई है।

प्रशासन में मची खलबली : 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम! – शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जशपुर कलेक्टर कार्यालय ने इसे अत्यंत प्राथमिकता देते हुए कड़ा रुख अपनाया है। डिप्टी कलेक्टर (वास्ते-कलेक्टर) हरिओम द्विवेदी द्वारा समय-सीमा (Time Limit) के तहत जांच और कार्रवाई के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं:

  • स्थापना शाखा को निर्देश (पत्र दिनांक 20/07/2026) : प्रभारी अधिकारी, स्थापना शाखा, जिला कार्यालय जशपुर को प्रकरण भेजकर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने तथा 7 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश (पत्र दिनांक 21/07/2026) : जिला शिक्षा अधिकारी, जशपुर को भी आदेशित किया गया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की तह तक जाकर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए और की गई कार्रवाई से ठीक 07 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से शिकायतकर्ता व कलेक्टोरेट को अवगत कराया जाए।

व्यंग्य बाण : “कागजों का जादू और हलफनामे का खेल” – बलिहारी है ऐसे ‘हुनरमंदों’ की, जो नियमों की धज्जियां उड़ाकर केवल कागजों की ‘कलाकारी’ और झूठे हलफनामों के बल पर सरकारी नौकरी अपनी जेब में डाल लेते हैं! क्या छत्तीसगढ़ शासन के वे कड़े नियम सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं, जिनके तहत संपन्न परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति से सख्त वर्जित किया गया है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन द्वारा तय किए गए इन 7 दिनों के भीतर वाकई कार्रवाई का चाबुक चलेगा, या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह लालफीताशाही और लीपापोती की भेंट चढ़ जाएगी? यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल जिला प्रशासन के मुंह पर एक करारा तमाचा होगा, बल्कि उन तमाम होनहार बेरोजगारों के साथ भी घोर अन्याय होगा जो वर्षों से पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ अपनी मेहनत के दम पर सफलता पाने की आस लगाए बैठे हैं।

अब सबकी निगाहें टिकी हैं प्रशासनिक जांच पर! – ​कलेक्टर महोदय की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली ‘समय-सीमा’ सूची में दर्ज इस बहुचर्चित मामले से अब पूरे जिले में सनसनी फैल गई है। देखना यह होगा कि क्या जिला शिक्षा विभाग और स्थापना शाखा महज औपचारिकता निभाकर मामले को दबाने का प्रयास करती है, या फिर फर्जीवाड़े की एक-एक परत खोलकर आरोपी को सेवा से बर्खास्त कर सलाखों के पीछे भेजने का रास्ता साफ करती है। न्यायप्रिय जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कड़े कदम पर टिकी हैं! 

पूर्व में प्रकाशित खबर :

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!