“कुर्सी सरपंच की, सील पतिदेव की!” – पत्थलगांव के सुखरापारा पंचायत में चल रहा ‘पति-राज’, लोकतंत्र शर्मसार!…

जशपुर। लोकतंत्र में जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है, ताकि वह उनकी समस्याओं को सुलझा सके। लेकिन जशपुर जिले के पत्थलगांव जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सुखरापारा में लोकतंत्र की एक नई और अनोखी परिभाषा गढ़ी जा रही है। यहां कुर्सी तो सरपंच महोदया की है, लेकिन सत्ता का असली रिमोट उनके ‘पतिदेव’ के हाथों में है!
सुनने में यह किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन सुखरापारा के उपसरपंच और पंचों के लिए यह एक कड़वी हकीकत है। मंगलवार को उपसरपंच देवप्रकाश साहू के नेतृत्व में दर्जन भर पंचों ने पत्थलगांव विधायक और अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को एक लिखित शिकायत सौंपकर पंचायत में चल रहे इस ‘अवैध साम्राज्य’ का भंडाफोड़ किया।

शिकायत में खुले 13 सनसनीखेज ‘काले कारनामे’ – शिकायतकर्ता पंचों का आरोप है कि सुखरापारा में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। आवेदन में दर्ज मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:
- ‘पतिदेव’ की जेब में पंचायत की सील: पंचायत सचिव कार्यालय की आधिकारिक सील सरपंच महोदया के बजाय उनके पति के पास रहती है।
- कागजों पर ही हो रही बैठकें: न तो ग्राम सभा बुलाई जाती है और न ही मासिक बैठकें होती हैं, फिर भी कागजों पर फर्जी कार्यवाही दर्ज कर ली जाती है।
- पीएम आवास में धांधली: प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र और अपात्र हितग्राहियों की सूची पंचों की सहमति के बिना ही तैयार कर ली जाती है।
- बैंक खाते से अवैध आहरण: बिना किसी पंचायत प्रस्ताव के, बैंक खाते से राशि आहरित की जा रही है और पंचों को इसका कोई हिसाब-किताब नहीं दिया जाता।
- पंचों के लिए कुर्सी तक नहीं: पंचायत भवन में निर्वाचित पंचों के बैठने तक के लिए कुर्सियों की कोई व्यवस्था नहीं है।
- राशन कार्ड पर अवैध वसूली: राशन कार्ड के पीछे टैक्स के नाम पर ₹300-₹300 की अवैध वसूली की जा रही है, जिसका कोई आधिकारिक हिसाब नहीं है।
- राशन वितरण में देरी: राशन का वितरण महीने के अंतिम सप्ताह में किया जाता है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी होती है।
“विधायक जी, कम से कम बैठने को कुर्सी तो दिलवा दीजिए!” – शिकायत पत्र में उपसरपंच और पंचों ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा है कि पंचायत भवन में निर्वाचित प्रतिनिधियों के बैठने के लिए कुर्सियां तक उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, सरपंच पति सरकारी और गैर-सरकारी कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होते हैं।
पंचों का दर्द: “जनता ने हमें वोट देकर पंच बनाया, लेकिन पंचायत भवन में हमारे लिए बैठने को एक कुर्सी तक नहीं है! वहीं दूसरी तरफ, बिना चुनाव जीते ‘सरपंच-पति’ पूरी पंचायत की सील पॉकेट में रखकर घूम रहे हैं!”
आवेदन पर इन जनप्रतिनिधियों ने किए दस्तखत : निष्पक्ष जांच और दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- देवप्रकाश साहू (उपसरपंच)
- अंशुल अग (पंच)
- नन्दकुमार पन्ना (पंच)
- जमुना साहू (पंच)
- संगीता कौशिक (पंच)
- टिलकुंवर (पंच)
- सेवन्ती सिदार (पंच)
- शशि कुमार भगत (पंच)
- लाछो बाई (पंच)
अब देखना यह है… उपसरपंच और पंचों ने विधायक और SDM पत्थलगांव को ज्ञापन देकर स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर सुखरापारा में ‘पति-राज’ ऐसे ही जारी रहेगा!




