खरसिया अस्पताल में युवक की मौत का मामला गहराया: ‘मृत घोषित करने के बजाय लाश रायगढ़ भेजी’, कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल…

रायगढ़। जिले अंतर्गत खरसिया स्थित सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। बवासीर (पाइल्स) जैसे सामान्य माने जाने वाले ऑपरेशन के दौरान एक 25 वर्षीय युवक की संदिग्ध मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है और न ही दोषी चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई हुई है। इससे क्षुब्ध होकर मृतक के परिजन मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और मामले की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की गुहार लगाई।

क्या है पूरा मामला? – प्राप्त जानकारी और परिजनों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए लिखित आवेदन के अनुसार, खरसिया की पुरानी बस्ती (वार्ड क्रमांक 07) निवासी रावेन्द्र प्रसाद शर्मा के छोटे बेटे तामेश्वर शर्मा (प्रदुम) को बीते 25 जून 2026 को पाइल्स के ऑपरेशन के लिए खरसिया के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल में पदस्थ डॉ. विक्रम राठिया और डॉ. सजन अग्रवाल द्वारा युवक का ऑपरेशन किया गया। परिजनों का सीधा आरोप है कि ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टरों द्वारा बरती गई घोर लापरवाही के कारण तामेश्वर की सांसे थम गईं।
‘गुनाह छिपाने के लिए लाश को किया रेफर’ – परिजनों का सनसनीखेज आरोप : आवेदन में मृतक के पिता रावेन्द्र प्रसाद शर्मा ने डॉक्टरों की संवेदनहीनता पर बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जब खरसिया अस्पताल में ही तामेश्वर की मौत हो गई, तो डॉ. विक्रम राठिया ने अपनी नाकामी और लापरवाही को छिपाने का प्रयास किया।
- रेफर की आड़ में खेल : आरोप है कि डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित करने के बजाय परिजनों को गुमराह किया और आनन-फानन में एम्बुलेंस बुलवाकर उसे रायगढ़ स्थित मेट्रो अस्पताल रेफर कर दिया।
- मेट्रो अस्पताल में हुआ पर्दाफाश : जब परिजन तामेश्वर को लेकर रायगढ़ के मेट्रो अस्पताल पहुंचे, तो वहां के डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद ही युवक को मृत घोषित कर दिया। वहां के चिकित्सकों ने परिजनों को स्पष्ट बताया कि युवक की मृत्यु काफी समय पहले (खरसिया अस्पताल में ही) हो चुकी थी।
न रिपोर्ट मिली, न कार्रवाई : आश्वासन निकला खोखला – घटना के तुरंत बाद उद्वेलित परिजनों और स्थानीय नगरवासियों ने खरसिया पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी और अस्पताल परिसर के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था।
- एसडीएम का आश्वासन निकला हवा-हवाई: प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) प्रवीण तिवारी ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया था। हालांकि, परिजनों का कहना है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी किसी भी डॉक्टर या स्टाफ पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- गायाब है पोस्टमार्टम रिपोर्ट: घटना की रात ही रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा मृतक का पोस्टमार्टम किया गया था। परिजनों का आरोप है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें पीएम रिपोर्ट (Post-Mortem Report) उपलब्ध नहीं कराई गई है। परिजनों को अंदेशा है कि साक्ष्यों को प्रभावित करने या मामले को दबाने की नीयत से रिपोर्ट रोकी जा रही है।
परिजनों की कलेक्टर से मुख्य मांगें – कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन सौंपकर पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग करते हुए निम्नलिखित कदम उठाने की अपील की है:
- मेडिकल कॉलेज की टीम द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट अविलंब सार्वजनिक की जाए और परिजनों को दी जाए।
- पूरे मामले की किसी स्वतंत्र व उच्चस्तरीय टीम से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- लापरवाही के दोषी डॉ. विक्रम राठिया, डॉ. सजन अग्रवाल एवं संबंधित अस्पताल स्टाफ के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC/BNS की सुसंगत धाराओं) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक तंत्र पर उठते बड़े सवाल :
- क्या शासकीय अस्पतालों में आम जनता की जान इतनी सस्ती हो चुकी है कि सामान्य ऑपरेशन में जान जाने के बाद भी जवाबदेही तय नहीं होती?
- एक महीने तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट न मिलना क्या किसी प्रशासनिक ढिलाई का नतीजा है या डॉक्टरों को बचाने का प्रयास?
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में परिजनों को कब तक न्याय दिला पाता है या यह मामला भी जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा।




