राजहरा में सट्टा कारोबार : क्या रज्जू पर पुलिस हाथ कस पाएगी?

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले के दल्ली राजहरा शहर के पंडर दल्ली इलाके में लंबे समय से सट्टा का कारोबार चलाने वाले सटोरिए बाप-बेटे के सामने राजहरा पुलिस का रडार फेल साबित हो रहा है। शहर के नागरिकों में उम्मीद जगी थी कि “नए थाना प्रभारी अविनाश सिंह” इस काले खेल पर लगाम लगाएंगे, लेकिन अभी तक कार्यवाही की महक भी नहीं आई। कहते हैं कि कई थाना प्रभारी यहां आये और गये, पर किसी में बल्कि दम ही नहीं था कि सट्टा के इस जाल को काट पाते।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रज्जू और उसके बेटे ने पुलिस विभाग में ऐसी ‘सेटिंग’ कर रखी है कि अधिकारी सिर्फ दिखावटी दौरों तक ही सीमित रह जाते हैं। लोग बताते हैं कि सट्टा के खुलेआम संचालन और लंबे समय से चल रही मनमानी के बावजूद राजहरा पुलिस उस मोहल्ले में कदम जमाने से कतराती है। कई बार अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, जिससे पुलिस के प्रति लोगों का भरोसा गंभीर रूप से डगमगा गया है।

लोगो का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए “दुर्ग आईजी अभिषेक शांडिल्य” तथा “बालोद एसपी योगेश कुमार पटेल” को मामले में सख्त निर्देश देना चाहिए था, पर दोनों ही अधिकारियों पर अंगुली उठती नजर आ रही है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो “उच्चाधिकारियों की उदासीनता और राजहरा पुलिस की लचर रवैये” ने अपराधियों में हौसला भर दिया है। इसके परिणामस्वरूप दिन-ब-दिन रज्जू के सट्टा कारोबार का दायरा बढ़ता जा रहा है और लोगों की शिकायतें हवा में लटकती रह गई हैं।

थाने में आने वाले कुछ पुराने और अनुभवी थाना प्रभारी भी इस मामले में सुधार करने की कोशिशें छोड़कर चले गए। हाशिये पर पड़े शहरवासी अब खुलेआम सवाल उठाने लगे हैं कि क्या राजहरा पुलिस सिर्फ रिपोर्टें और तालियाँ देखकर संतुष्ट हो लेती है, या फिर स्थानीय लोगों के अधिकारों और कानून के संचालन के प्रति गंभीर है। शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों और दुकानदारों ने भी कहा कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो लोग प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल करेंगे और आगे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर हो सकते हैं।
वहीं थानेदार की बदलती तस्वीर ने भी जनता की उम्मीदों को झटका दिया है। जहां एक ओर नई कप्तानी के आते ही उम्मीद जगी थी कि रज्जू के सट्टा कारोबार पर अंकुश लगेगा, वहीं ठोस कार्यवाही की अनुपस्थिति ने यह संकेत दिया है कि सिर्फ निगाहें उठाना और रिपोर्ट तैयार कर फाइलें बंद कर देना ही शायद राजहरा पुलिस की प्राथमिकता बन गई है। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि अब भी मामले पर सख्ती नहीं दिखाई गई तो प्रशासन को बीच में आकर स्थिति संभालनी पड़ेगी।
अंततः शहर की अपेक्षा है कि नई पुलिस व्यवस्था सिर्फ नाम की सुर्खियों तक सीमित न रहे और रज्जू सटोरिए व उसके बेटे के खिलाफ कानूनी चर्चा को आत्मसात कर तत्काल और पारदर्शी कार्यवाही करे, वरना लोगों का धैर्य भी कम हो रहा है वही रज्जू का सट्टा साम्राज्य बेपरवाह बढ़ता रहेगा।
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रज्जू के “सट्टा साम्राज्य” पर क्या नकेल कस पाएगी पुलिस?




