सरकारी कर्मचारियों की ‘मनमर्जी’ पर सर्जिकल स्ट्राइक : बिना मंजूरी छुट्टी ली तो लगेगा ‘सर्विस ब्रेक’!…

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन की दिशा में अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी एक ताजा आदेश ने सरकारी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना पूर्व स्वीकृति के छुट्टी पर जाना ‘स्वैच्छिक अनुपस्थिति’ माना जाएगा, जिसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
आदेश का मुख्य प्रहार : ‘ब्रेक इन सर्विस’ का खतरा – सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना कार्यालय से गायब पाया जाता है, तो इसे केवल अनुपस्थिति नहीं माना जाएगा, बल्कि सेवा नियमों के तहत ‘ब्रेक इन सर्विस’ (सेवा में व्यवधान) के रूप में देखा जाएगा। इसका सीधा असर कर्मचारी की वरिष्ठता, पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर पड़ सकता है।
आदेश की 3 बड़ी और सख्त शर्तें :
- छुट्टी से पहले मंजूरी अनिवार्य : कोई भी शासकीय सेवक तब तक पद नहीं छोड़ेगा जब तक अवकाश लिखित में स्वीकृत न हो जाए।
- कैजुअल लीव (CL) पर भी नजर : आकस्मिक अवकाश की स्थिति में भी अब फोन या डिजिटल माध्यम से पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। दफ्तर लौटते ही इसकी लिखित पुष्टि तुरंत करनी होगी।
- चार्ज सौंपना जरूरी : लंबे अवकाश (EL आदि) पर जाने से पहले अपने कार्यों का प्रभार (Charge) दूसरे अधिकारी को विधिवत सौंपना होगा ताकि जनता का काम न रुके।
आखिर क्यों लिया गया यह सख्त फैसला? – आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि आगामी 3 महीनों में ‘सुशासन तिहार’ और ‘जनगणना’ जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य होने वाले हैं। सरकार किसी भी कीमत पर इन कार्यों में ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इसीलिए अगले 90 दिनों तक इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का फरमान जारी किया गया है।
“सुशासन की दृष्टि से शासन के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह अनुशासन आवश्यक है।”
अंशिका ऋषि पाण्डेय (उप सचिव, छत्तीसगढ़ शासन)
कर्मचारियों के लिए सीधी चेतावनी : यह आदेश न केवल क्लर्कों बल्कि सभी विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और संभाग आयुक्तों को भी भेज दिया गया है। साफ संदेश है –अब दफ्तरों में ‘साहब फील्ड पर हैं’ या ‘बिना बताए नदारद’ रहने का खेल नहीं चलेगा। सीधा अनुशासन होगा, या फिर सीधा एक्शन!




