सावधान रायपुर! चारागाह की जमीन पर कब्जे की साजिश ; मजदूर बोले- ‘पार्षद ने भेजा है’, जनता बोली – ‘जमीन कब्जाने नहीं देंगे’!…

रायपुर। राजधानी के भाठगांव इलाके में सरकारी चारागाह की जमीन को कब्जाने के फेर में पर्यावरण की बलि चढ़ाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सरेआम दर्जनों हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ियां और आरा मशीनें चला दी गईं। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्थानीय लोग पेड़ों की कटाई का विरोध करते नजर आ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कटाई के पीछे स्थानीय भाजपा पार्षद रवि सोनकर का नाम सामने आ रहा है।
मजदूरों का कबूलनामा : “पार्षद के कहने पर काट रहे पेड़” – घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने जब पेड़ों की कटाई कर रहे मजदूरों को घेरा और उनसे पूछताछ की, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि वे पार्षद रवि सोनकर के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। ग्रामीणों ने मौके से आरा मशीन और कुल्हाड़ियां जब्त कर ली हैं। वायरल वीडियो में लोग ठेकेदार और मजदूरों से जवाब-तलब करते दिख रहे हैं, जिससे सत्ता के रसूख तले हो रहे इस अवैध काम की पोल खुल गई है।
कब्जे की नीयत, पर्यावरण से खिलवाड़ : स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि यह जमीन सालों से सार्वजनिक चारागाह के रूप में उपयोग की जा रही है। भू-माफिया की नजर अब इस बेशकीमती जमीन पर है, और कब्जे की पहली सीढ़ी के रूप में यहां लगे पेड़ों को साफ किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह की अंधाधुंध कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।
प्रशासन और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया -इस गंभीर मामले में नगर निगम और प्रशासन ने सख्त तेवर दिखाए हैं :
- महापौर मीनल चौबे : उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध काम करने वाला कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। महापौर ने जांच के बाद कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
- जोन कमिश्नर हितेंद्र यादव : कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच टीम भेजने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की बात कही है।
आरोपी पार्षद की चुप्पी – पार्षद रवि सोनकर पर सीधे आरोप लगने और मजदूरों द्वारा उनका नाम लिए जाने के बावजूद, उन्होंने अब तक इस पर कोई सफाई नहीं दी है। संपर्क करने की कोशिशों और संदेशों का पार्षद की ओर से कोई जवाब नहीं आया है, जो उनकी भूमिका पर संदेह के घेरे को और गहरा करता है।
बड़ा सवाल : क्या राजधानी में सरकारी जमीनों को बचाने के लिए प्रशासन रसूखदारों पर शिकंजा कसेगा, या फाइलें जांच के नाम पर दबकर रह जाएंगी?




