विशेष रिपोर्ट : रायगढ़ जनसंपर्क विभाग का वह ‘ब्लैक फ्राइडे’ और दो महिला अफसरों की जंग…

रायगढ़। सरकारी दफ्तरों में काम के दबाव और आपसी खींचतान की खबरें तो अक्सर आती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में 14 फरवरी 2020 को जो हुआ, उसने पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। एक सहायक जनसंपर्क अधिकारी (APRO) का अपने ही विभाग के ‘ऑफिशियल ग्रुप’ में सुसाइड नोट साझा करना महज एक भावुक पोस्ट नहीं थी, बल्कि विभाग के भीतर पनप रहे गहरे असंतोष का विस्फोट था।
वह दोपहर जब थम गई प्रशासन की सांसें – 14 फरवरी 2020 की दोपहर करीब 1:00 बजे तक सब सामान्य था। जिला पंचायत चुनाव की गहमागहमी के बीच मीडिया और अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप ‘PRO Raigarh’ में अचानक एक मैसेज फ्लैश हुआ। मैसेज एप्रो नूतन सिदार का था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी मौत के लिए अपनी वरिष्ठ अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर ऊषा किरण बड़ाईक को जिम्मेदार ठहराते हुए खुदकुशी की बात कही थी।
जैसे ही यह मैसेज वायरल हुआ, कलेक्ट्रेट से लेकर पुलिस मुख्यालय तक हड़कंप मच गया। कलेक्टर के निर्देश पर तुरंत पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम हरकत में आई।
‘ऑपरेशन ट्रेसिंग’ : घर से स्टेशन तक की दौड़ – पुलिस सबसे पहले नूतन सिदार के कोतरा रोड स्थित निवास पर पहुंची, लेकिन वहां ताला लटका मिला। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस की टीमें शहर के अलग-अलग हिस्सों में दौड़ीं।
- लोकेशन ट्रैक : मोबाइल टावर ने पहले जूटमिल और फिर रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल दिखाया।
- स्कूटी की बरामदगी : रेलवे स्टेशन के बाहर उनकी स्कूटी लावारिस हालत में मिली, जिससे अनहोनी की आशंका और गहरा गई।
- रेस्क्यू : अंततः जीआरपी और आरपीएफ की मदद से नूतन सिदार को स्टेशन के वेटिंग हॉल में पाया गया। वे गहरे तनाव में थीं। वहां से उन्हें सुरक्षित निकालकर एसडीएम आशीष देवांगन के पास ले जाया गया।
आरोपों का पुलिंदा : आखिर विवाद क्या था? – जांच और पूछताछ में जो बातें निकलकर सामने आईं, वे विभाग के भीतर की गुटबाजी को उजागर करती थीं:
- नूतन सिदार का पक्ष : उन्होंने आरोप लगाया कि डिप्टी डायरेक्टर उन्हें छोटी-छोटी बातों पर अपमानित करती थीं। उनके कार्यों की फाइलों को बेवजह रोका जाता था और उन्हें जानबूझकर ऐसे नोटिस दिए जाते थे जिससे उनका मानसिक उत्पीड़न हो। उन्होंने इसे ‘आत्मसम्मान की लड़ाई’ करार दिया।
- ऊषा किरण बड़ाईक का पक्ष : डिप्टी डायरेक्टर ने इन आरोपों को प्रशासनिक अनुशासन से जोड़ दिया। उनका तर्क था कि नूतन सिदार कार्यालयीन समय का पालन नहीं करती थीं और महत्वपूर्ण बैठकों (जैसे समय-सीमा की बैठक) में जाने के बजाय घर बैठे प्रेस नोट मांगती थीं। नोटिस देना प्रताड़ना नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था।
प्रशासनिक ‘सर्जरी’ और जांच दल : मामला चूंकि दो महिला राजपत्रित अधिकारियों से जुड़ा था और सीधे तौर पर जनसंपर्क विभाग (जो सरकार की छवि बनाता है) की साख पर था, इसलिए रायपुर मुख्यालय ने इसे गंभीरता से लिया।
- मुख्यालय की टीम : रायपुर से तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल रायगढ़ पहुंचा। टीम ने कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए।
- खुलासा : जांच में यह बात साफ हुई कि कार्यालय दो गुटों में बंट चुका था। अधिकारी एक-दूसरे से सीधे बात करने के बजाय फाइलों और नोटिस के जरिए ‘जंग’ लड़ रहे थे, जिससे सरकारी काम प्रभावित हो रहा था।
अंतिम नतीजा : तबादले से समाधान – कई दिनों तक चली जांच और तनावपूर्ण माहौल के बाद, शासन ने कड़ा फैसला लिया। यह माना गया कि अब इन दोनों अधिकारियों का एक साथ एक जिले में काम करना संभव नहीं है।
- दोनों महिला अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से अलग-अलग जिलों में स्थानांतरण कर दिया गया।
- विभागीय स्तर पर अनुशासन बनाए रखने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गईं।
नोट : यह खबर विभिन्न स्त्रोत (दैनिक भास्कर, पत्रिका, हरिभूमि ) जैसे अखबारों में छपी खबरों पर आधारित है…एवं साक्ष्य के रूप में संकलित है…
दैनिक भास्कर लिंक : https://dainik-b.in/Hwd1GVRXp5
पत्रिका लिंक : https://www.patrika.com/raigarh-news/public-relations-officer-writes-suicide-note-in-whatsapp-group-5775157





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