विशेष रिपोर्ट : रायपुर नगर निगम में ‘फाइल चोर’ सक्रिय? 100 एकड़ जमीन के बाद अब गार्डन की फाइल गायब, भ्रष्टाचार की बू…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी का नगर निगम इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर कम और ‘गायब’ होती फाइलों को लेकर ज्यादा सुर्खियों में है। नगर निगम मुख्यालय की नाक के नीचे से फाइलों का चोरी हो जाना या गुम हो जाना, किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। ताजा मामला मुख्यालय के ठीक सामने स्थित गार्डन के व्यावसायिक उपयोग और उसकी शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी फाइल का है।
इन घटनाओ ने निगम प्रशासन की सुरक्षा और पारदर्शिता के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
गार्डन बना ‘प्राइवेट प्रॉपर्टी’ : 5% का नियम, 50% पर कब्जा? – मुख्यालय के सामने स्थित इस गार्डन के रखरखाव की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को सौंपी गई थी। अनुबंध के मुताबिक, गार्डन के कुल क्षेत्रफल के मात्र 5% हिस्से में ही दुकानों या फूड स्टॉल के संचालन की अनुमति थी।
- शिकायत : आरोप है कि एजेंसी ने रसूख के दम पर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक क्षेत्र का व्यावसायिक दोहन किया।
- लापरवाही : न तो वहां सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त हैं और न ही साफ-सफाई की कोई ठोस व्यवस्था।
- गायब फाइल का रहस्य : जैसे ही इन अनियमितताओं पर जांच की आंच बढ़ी, मुख्यालय से इससे संबंधित अहम दस्तावेज ही गायब हो गए। जानकारों का मानना है कि गड़बड़ियों को दबाने के लिए फाइल को जानबूझकर खुर्द-बुर्द किया गया है।
जोन-10 का ‘महा-घोटाला’ : 100 एकड़ जमीन पर बिल्डरों की नजर – जोन-10 अमलीडीह कार्यालय से 100 एकड़ जमीन से जुड़ी फाइलें गायब होने की खबर ने हड़कंप मचा दिया है ।
- मामला क्या है? बोरियाकला के ओम नगर, साईं नगर और बिलाल नगर के 69 भूखंडों (Plots) की लेआउट फाइलें गायब हैं।
- साजिश का तरीका : इन फाइलों को नियमतः निगम मुख्यालय भेजा जाना था, लेकिन इन्हें चुपके से ‘टाउन एंड कंट्री प्लानिंग’ विभाग भेज दिया गया।
- आशंका : आशंका जताई जा रही है कि बिल्डरों को अवैध लाभ पहुंचाने और सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने के लिए यह पूरा प्रपंच रचा गया है।
प्रशासनिक सर्जरी: कमिश्नर अटैच, FIR की तैयारी – मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने सख्त रुख अपनाया है :
- कार्रवाई : जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे को तत्काल प्रभाव से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।
- नई जिम्मेदारी : मोनेश्वर शर्मा को जोन-10 की कमान सौंपी गई है।
- कानूनी कदम : नए अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि फाइलों की चोरी या गायब करने के मामले में अज्ञात या संदिग्धों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जा रही है।
महापौर का कड़ा रुख : महापौर मीनल चौबे ने इस मामले में स्पष्ट कहा है :
”नगर निगम की संपत्ति के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे वह गार्डन का मामला हो या 100 एकड़ जमीन का, हर दस्तावेज की जांच होगी। जो भी अधिकारी या बाहरी एजेंसी इसमें संलिप्त पाई जाएगी, उसके खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी।”
तीखे सवाल : क्या यह महज लापरवाही है? –
- अगर मुख्यालय में ही फाइलें सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता के दस्तावेजों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
- फाइल गायब होने के समय ड्यूटी पर तैनात क्लर्कों और अधिकारियों पर अब तक कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में फाइलें भेजने के पीछे कोई बड़ा ‘सफेदपोश’ हाथ है?
रायपुर नगर निगम में फाइलों का गायब होना एक खतरनाक परिपाटी बन गई है। यह सीधे तौर पर राजस्व की हानि और भू-माफियाओं को संरक्षण देने जैसा है। अब सबकी नजरें पुलिस जांच और निगम की आंतरिक जांच पर टिकी हैं – क्या असली ‘फाइल चोर’ पकड़े जाएंगे या जांच की फाइल भी गायब हो जाएगी?
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