लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश : सूरजपुर में सच दिखाने पर पत्रकारों को मिली ‘तालिबानी’ सजा… जाने पूरा मामला…

सूरजपुर। विशेष विश्लेषण…
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से मानवता और कानून को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। भास्कर पारा कोयला खदान क्षेत्र में कवरेज करने गए तीन पत्रकारों—चंद्र प्रकाश साहू, लोकेश गोस्वामी और मनीष जायसवाल—को न केवल बंधक बनाया गया, बल्कि उनके साथ वह बर्ताव किया गया जो आमतौर पर अपराधियों के साथ भी नहीं किया जाता।
गुंडागर्दी का नंगा नाच : सड़क से उठा ले गए हमलावर – घटना रविवार, 19 अप्रैल की है। पत्रकार जब खदान क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और ग्रामीणों की समस्याओं को रिकॉर्ड कर रहे थे, तब उन पर सफेद बोलेरो में आए 5-6 नकाबपोश गुंडों ने हमला बोल दिया।
- बर्बरता की हदें पार : पत्रकारों को जमीन पर पटककर लात-घूंसों से पीटा गया।
- अपहरण और बंधक : उन्हें जबरन गाड़ी में डालकर खदान परिसर ले जाया गया, जहाँ 4 घंटे तक उन्हें “अघोषित कैद” में रखा गया।
- साक्ष्यों की हत्या : पत्रकारों के मोबाइल छीनकर सारे वीडियो फुटेज डिलीट कर दिए गए। यह स्पष्ट रूप से अपनी कमियों को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश थी।
पहचान पत्र छीने, फिर दी मानसिक प्रताड़ना : खदान परिसर के भीतर का नजारा किसी डरावनी फिल्म जैसा था। पत्रकारों के पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेज छीन लिए गए। उन्हें जमीन पर बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनसे जबरन यह कुबूल करवाने की कोशिश की गई कि वे “अवैध रूप से घुसे” थे।
“बड़े पत्रकार पैसा लेकर चले जाते हैं, तुम जैसे छोटों की यहाँ क्या बिसात?”- हमलावरों के ये शब्द बताते हैं कि वहां माफियाराज किस कदर हावी है।
सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां : रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों ने पाया कि खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग के समय न तो पर्याप्त फेंसिंग थी और न ही कोई सुरक्षा घेरा। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर वहां से गुजर रहे थे। इसी सच को दबाने के लिए पत्रकारों के कैमरे और आवाज को कुचलने का प्रयास किया गया।
प्रशासन के सामने सुलगते सवाल :
- क्या छत्तीसगढ़ में अब सच दिखाना जान जोखिम में डालना है?
- खदान संचालकों को पत्रकारों को बंधक बनाने और मारपीट करने का अधिकार किसने दिया?
- क्या अमृत सरोवर योजना और खदान की अनियमितताओं को छिपाने के लिए यह सुनियोजित हमला था?
कार्रवाई की मांग : मनीष जायसवाल की बिगड़ती तबीयत और पत्रकारों को दी गई धमकियां यह साबित करती हैं कि यह हमला सिर्फ तीन व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी पर है। हमर उत्थान सेवा समिति ने थाना झिलमिली में शिकायत दर्ज कराई है।
अब मांग केवल एफआईआर की नहीं, बल्कि उन चेहरों को बेनकाब करने की है जो पर्दे के पीछे बैठकर इन गुंडों को पाल रहे हैं। यदि आज सूरजपुर के पत्रकारों को न्याय नहीं मिला, तो कल छत्तीसगढ़ का कोई भी कोना सच बोलने के लायक नहीं बचेगा।




