रायगढ़

रायगढ़ में ‘खून की होली’ : खाने की थाली छोड़ मौत के आगोश में सुलाया सगा भाई; हत्यारे को उम्रकैद, झूठी गवाही देने वाले पिता पर भी लटकी तलवार!…

रायगढ़।  रंगों का त्यौहार होली खुशियों के बजाय मातम में बदल गया जब एक बड़े भाई ने अपने ही छोटे भाई के खून से होली खेल डाली। मामला रायगढ़ जिले के जूटमिल थाना क्षेत्र का है, जहाँ मामूली कहासुनी में बड़े भाई ने छोटे भाई के सिर पर डंडे से ऐसा वार किया कि उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

​सत्र न्यायालय ने इस जघन्य अपराध पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने न्याय की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए आरोपी को बचाने के लिए झूठी गवाही देने वाले पिता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

क्या थी वो खौफनाक रात? (घटनाक्रम) – ​अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना 14 मार्च, 2025 की है।

  • होली की रात: तरकेला निवासी सुशील कुमार दास (28) और उसका छोटा भाई निर्मल दास रात करीब 8 बजे बस्ती से घर लौटे।
  • विवाद की जड़: पिता पंचराम ने दोनों बेटों को खाना खाने को कहा। छोटे भाई निर्मल ने खाना खा लिया, लेकिन बड़ा भाई सुशील बिना खाए सोने चला गया। इसी बात को लेकर दोनों में बहस छिड़ गई।
  • मौत का वार: पिता के मना करने के बावजूद सुशील का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने घर में रखा डंडा उठाया और निर्मल को जान से मारने की धमकी देते हुए उसके सिर पर पूरी ताकत से वार कर दिया।
  • निर्मम हत्या: सिर पर चोट लगते ही निर्मल जमीन पर गिर पड़ा। हैवान बन चुके सुशील ने उसके बाद भी उसे हाथ-पैरों से मारा, जिससे निर्मल ने वहीं दम तोड़ दिया।

कोर्ट का फैसला : “हत्यारे को बख्शा नहीं जाएगा” – मामले की सुनवाई रायगढ़ सत्र न्यायालय में हुई। लोक अभियोजक पी.एन. गुप्ता ने पुलिस की जांच और साक्ष्यों को मजबूती से रखा। विद्वान न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन ने गवाहों और सबूतों के आधार पर सुशील कुमार दास को धारा 302 (हत्या) का दोषी करार दिया।

सजा का ऐलान:

कोर्ट ने आरोपी सुशील कुमार दास को आजीवन कारावास और 50 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

पिता के झूठ पर कोर्ट की सख्ती : ​इस केस में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मृतक और आरोपी के पिता, पंचराम ने कोर्ट में झूठा बयान दिया। माना जा रहा है कि वह अपने जीवित बेटे (आरोपी) को जेल जाने से बचाना चाहता था।

​लेकिन, कानून की आंखों में धूल झोंकने की यह कोशिश नाकाम रही। न्यायाधीश ने न केवल आरोपी को सजा दी, बल्कि पिता पंचराम के खिलाफ भी झूठा साक्ष्य (Perjury) देने के लिए अपराध दर्ज करने का सख्त आदेश दिया है।

खबर का सार : गुस्से और आवेश में एक भाई ने दूसरे की जान ले ली और अब वह सलाखों के पीछे अपनी पूरी जिंदगी काटेगा। वहीं, पुत्र मोह में झूठ बोलने वाले पिता को भी अब कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह फैसला समाज के लिए एक नजीर है कि अपराध चाहे घर की चारदीवारी में हो, कानून के हाथ सबसे लंबे होते हैं।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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