भिलाई स्टील प्लांट में महाघोटाला : 400 CCTV और 1200 जवानों की नाक के नीचे से करोड़ों के लोहे की चोरी, डस्ट के नाम पर चल रहा था काला खेल!…

दुर्ग। देश के सबसे प्रतिष्ठित उपक्रमों में से एक, भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की अभेद्य मानी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था की उस वक्त धज्जियां उड़ गईं, जब करोड़ों रुपये के लोहे की संगठित चोरी का पर्दाफाश हुआ। दुर्ग पुलिस ने भिलाई-3 थाना क्षेत्र के अकलोरडीह गांव में जब एक गुप्त गोदाम पर छापा मारा, तो वहां मौजूद लोहे का विशाल जखीरा और भारी-भरकम मशीनों का बेड़ा देखकर जांच अधिकारियों की आंखें भी फटी की फटी रह गईं।

इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि बीएसपी के भीतर ‘रक्षक ही भक्षक’ की तर्ज पर एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसे सफेदपोशों और सुरक्षा प्रहरियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।

प्रमुख बिंदु (एक नज़र में) :
- बरामदगी : 100 टन से अधिक चोरी का लोहा और करोड़ों की भारी मशीनें जब्त।
- सील हुआ ठिकाना : अकलोरडीह स्थित मोहम्मद सलीम का गोदाम सील।
- फरार आरोपी : मुख्य मास्टरमाइंड संजय सिंह और गोदाम मालिक मोहम्मद सलीम की सरगर्मी से तलाश।
- सुरक्षा पर सवाल : 400 से ज्यादा सीसीटीवी और 1200 CISF जवानों के कड़े पहरे के बावजूद कैसे पार हुआ करोड़ों का माल?
डस्ट परिवहन की आड़ में चल रहा था ‘काला कारोबार’ – प्रारंभिक जांच में जो सबसे खौफनाक सच सामने आया है, वह है इस चोरी का ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’। यह कोई एक या दो दिन की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा एक संगठित अपराध है। शातिर माफिया डस्ट (राख या वेस्ट) परिवहन का टेंडर लेकर उसकी आड़ में बीएसपी का बेशकीमती लोहा पार कर रहे थे।
संयंत्र से ट्रकों में डस्ट के नीचे लोहे को छिपाकर बाहर निकाला जाता था और सीधे अकलोरडीह स्थित मोहम्मद सलीम के गोदाम में डंप कर दिया जाता था। यहां से इस चोरी के माल को अन्य राज्यों और बड़े कबाड़ियों तक खपाने का पूरा नेटवर्क तैयार था।
छापेमारी में मिली मशीनों की फौज, पुलिस भी हैरान – दुर्ग पुलिस की विशेष टीम ने जब इस गोदाम पर दबिश दी, तो नजारा किसी बड़े औद्योगिक निर्माण स्थल जैसा था। पुलिस ने मौके से सिर्फ 100 टन लोहा ही नहीं, बल्कि चोरी के इस काले खेल को अंजाम देने वाली मशीनों की पूरी फौज जब्त की है। गोदाम से करीब एक दर्जन भारी वाहन जब्त किए गए हैं, जिनमें विशाल पोकलेन मशीनें, बुलडोजर, बड़े डंपर ट्रक और चैन माउंटेन जैसे उपकरण शामिल हैं। इतनी बड़ी मशीनों का एक अवैध गोदाम में संचालन चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि माफियाओं के हौसले कितने बुलंद थे।
बीएसपी प्रबंधन और CISF की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल – इस पूरे महाघोटाले ने बीएसपी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
- खुफिया तंत्र फेल : जिस परिसर में चप्पे-चप्पे पर 400 से अधिक हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगे हों, वहां से ट्रकों में भरकर लोहा कैसे बाहर निकल गया?
- मिलीभगत की बू : संयंत्र की सुरक्षा का जिम्मा 1200 से अधिक सीआईएसएफ (CISF) के जवानों और अधिकारियों के कंधों पर है। बिना गेट पास और बिना सघन चेकिंग के एक सुई भी बाहर नहीं जा सकती, तो ट्रकों में लदा टनों लोहा गेट से कैसे पार हो रहा था?
यह साफ इशारा करता है कि संयंत्र के भीतर कई स्तरों पर बैठे अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और ट्रांसपोर्ट माफियाओं का एक मजबूत गठजोड़ (नेक्सस) काम कर रहा है। बिना ‘अंदरूनी सेटिंग’ के इतनी बड़ी सेंधमारी असंभव है।
आगे क्या? – पुलिस ने गोदाम को पूरी तरह से सील कर दिया है और अब फरार चल रहे मुख्य आरोपी संजय सिंह और गोदाम संचालक मोहम्मद सलीम की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं। पुलिस बीएसपी के उन अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भी कुंडली खंगाल रही है, जिनकी ड्यूटी उन गेटों और शिफ्टों में थी जहां से ये ट्रक गुजरे थे।
उम्मीद की जा रही है कि संजय सिंह और मोहम्मद सलीम की गिरफ्तारी के बाद बीएसपी के कई ‘सफेदपोश’ अधिकारियों और बड़े कबाड़ माफियाओं के चेहरों से नकाब उतरेगा। फिलहाल, इस कार्रवाई ने इस्पात नगरी में हड़कंप मचा दिया है।




