सत्ता की हनक! BJP विधायक पर नायब तहसीलदार को सरेआम पीटने का आरोप; विरोध में तहसीलदारों का सामूहिक अवकाश… कलेक्टर परिसर में धरना…

सरगुजा जिले में ‘खादी’ और ‘प्रशासन’ के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर राजापुर उप-तहसील के नायब तहसीलदार तुषार मानिक को सरेआम पीटने और कपड़े फाड़ने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासनिक महकमे में भारी उबाल है। घटना के विरोध में जिले के सभी तहसीलदार सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं और कामकाज ठप कर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है। वहीं, विधायक समर्थक भी एफआईआर वापसी की मांग को लेकर थाने के सामने धरने पर बैठ गए हैं।
खादी vs अफसरशाही : बवाल के मुख्य बिंदु –
- सरेआम पिटाई का आरोप: BJP विधायक और उनके 10 समर्थकों पर बीच-बचाव करने आए SDM के सामने नायब तहसीलदार को पीटने का गंभीर आरोप।
- प्रशासनिक हड़ताल: छ.ग. कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने खोला मोर्चा; सामूहिक अवकाश पर गए तहसीलदार, 24 घंटे में गिरफ्तारी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।
- थाने का घेराव: दोनों पक्षों के बीच आर-पार; विधायक समर्थकों का थाने के बाहर धरना, तो प्रशासन भी कार्रवाई पर अड़ा।
- दोनों तरफ से काउंटर FIR: विधायक पर शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट का केस दर्ज, तो अफसर पर भी विधायक की बहन से बदसलूकी की FIR।
कैसे सुलग उठी चिंगारी? (विवाद की इनसाइड स्टोरी) – पूरे बवाल की जड़ मैनपाट की राजापुर उप-तहसील में एक जमीन की फाइल है। विधायक टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी ने 14 मई को शाख शोध पत्र बनवाने के लिए फाइल जमा की थी।
- विधायक की बहन का आरोप : बुधवार को जब वे तहसील पहुंचीं और हस्ताक्षर करने को कहा, तो नायब तहसीलदार तुषार मानिक भड़क गए। उन्होंने फाइल फेंक दी और कहा- “तुम होती कौन हो हस्ताक्षर करने के लिए कहने वाली?” इसके बाद बदसलूकी कर उन्हें दफ्तर से बाहर निकाल दिया गया।
- नायब तहसीलदार की सफाई : कोई अभद्रता नहीं की गई। महिला तुरंत साइन करने का दबाव बना रही थीं, जबकि उन्हें नियमानुसार अगले दिन बुलाया गया था।
शाम 6 बजे का ‘वो’ हाईवोल्टेज ड्रामा – बहन के साथ बदसलूकी की खबर मिलते ही सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों के साथ राजापुर तहसील पहुंच गए। वहां एसडीएम फागेश सिन्हा भी मौजूद थे।
अफसर का दर्द- ‘किनारे ले जाकर पीटा, कपड़े फाड़े’
”विधायक रामकुमार टोप्पो ने मुझे किनारे बुलाया और अचानक मारपीट शुरू कर दी। उनके समर्थकों ने भी मुझे बुरी तरह पीटा। मेरे कपड़े फाड़ दिए गए। SDM फागेश सिन्हा बीच-बचाव न करते, तो हालात और बिगड़ जाते। उन्होंने ही मुझे गाड़ी में बिठाकर सुरक्षित बाहर निकाला।” – (तुषार मानिक, पीड़ित नायब तहसीलदार)
विधायक का पलटवार- ‘मैंने हाथ नहीं उठाया’
”अफसर ने मेरी बहन के साथ सरेआम दुर्व्यवहार किया था। इससे वहां मौजूद मेरे समर्थकों में आक्रोश था। मैंने खुद किसी के साथ कोई मारपीट नहीं की है। पुलिस जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” – (रामकुमार टोप्पो, BJP विधायक)
पुलिस महकमे में हड़कंप, दर्ज हुई काउंटर FIR – मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रातों-रात दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर FIR दर्ज कर ली है:
- विधायक और समर्थकों पर एक्शन : नायब तहसीलदार की शिकायत पर विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसुफ, नाजिम राजा, पंकज गुप्ता सहित 10 लोगों पर BNS की धारा 221, 221(1), 132, 191(2) के तहत केस दर्ज।
- अफसर पर एक्शन : विधायक की बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार के खिलाफ भी दुर्व्यवहार का मामला दर्ज।
अल्टीमेटम : “गिरफ्तारी नहीं हुई तो चक्का जाम कर देंगे” – अधिकारी के साथ हुई इस घटना ने प्रशासनिक अमले को आक्रोशित कर दिया है।
“हमारे साथी को सरेआम पीटा गया है। यह गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमने कामकाज बंद कर दिया है। 24 घंटे के अंदर मुख्य आरोपी (विधायक) और उनके साथियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।” – उमेश बाज (तहसीलदार, सीतापुर)
विपक्ष का प्रहार : “क्या सीएम अपने विधायक को जेल भेजेंगे?” – छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने इस घटना को लेकर विष्णुदेव साय सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
- PCC चीफ दीपक बैज की खरी-खरी : “सुशासन तिहार के नाम पर भाजपाई खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं। मंत्री, सांसद अधिकारियों को गालियां दे रहे हैं और अब विधायक उन्हें पीट रहे हैं। मुख्यमंत्री जवाब दें कि वो अपने इस गुंडे विधायक को जेल भेजेंगे या नहीं?”
- पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव की नसीहत : “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। चुनाव जीतने का अर्थ यह नहीं होता कि आप मनमानी करें। जनता ने जिम्मेदारी दी है, कोई निरंकुश अधिकार नहीं। भाजपा नेताओं को इस मानसिकता से उबरना होगा।”
ग्राउंड जीरो का हाल : फिलहाल सरगुजा में तनावपूर्ण शांति है। तहसील कार्यालय सूने पड़े हैं और सड़कों पर दोनों गुटों का शक्ति प्रदर्शन जारी है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस सियासी और प्रशासनिक टकराव को शांत करने की है।
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