सारंगढ़ में ‘सर्वमंगला क्रशर’ का काला खेल: बिना लीज खड़ा किया चूना पत्थर का अवैध पहाड़, नियम-कानूनों की उड़ा रहा धज्जियां!…

सारंगढ़। क्या नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? सारंगढ़ में संचालित ‘सर्वमंगला क्रशर’ की दबंगई और मनमानी देखकर तो यही लगता है। बिना किसी वैध खनन लीज के और भंडारण क्षमता से कई गुना ज्यादा चूना पत्थर का अवैध स्टॉक कर, इस क्रशर संचालक ने शासन-प्रशासन को खुली चुनौती दे रखी है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस खेल में पर्यावरण, सरकारी खजाने और ग्रामीणों की जिंदगी को ताक पर रख दिया गया है।
प्रमुख आरोप और जमीनी हकीकत :
- सरकारी खजाने पर सीधा डाका : बिना वैध लीज के भारी मात्रा में चूना पत्थर का स्टॉक करना सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार के राजस्व पर सीधा डाका है। इस क्रशर के आड़ में क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन के काले कारोबार को धड़ल्ले से बढ़ावा दिया जा रहा है।
- सांसों में घुलता जहर, ग्रामीणों का जीना मुहाल : क्रशर से उठने वाले धूल के गुबार और भयंकर प्रदूषण ने आसपास के ग्रामीणों का दम घोंट कर रख दिया है। लोग खुली हवा में सांस लेने को तरस रहे हैं। संचालक अपने चंद मुनाफे के लिए ग्रामीणों और मासूम बच्चों की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहा है।
- सड़कों का चीरहरण और बाधित आवाजाही : क्षमता से अधिक माल लादे हुए भारी वाहनों की बेतहाशा आवाजाही ने गांव की सड़कों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। बड़े-बड़े गड्ढों और उड़ती धूल के कारण आम लोगों का सड़कों पर चलना जानलेवा साबित हो रहा है।
प्रशासन और खनिज विभाग की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठते सवाल – सबसे बड़ा और गंभीर सवाल स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। इतना बड़ा अवैध स्टॉक रातों-रात तो जमा नहीं हुआ होगा।
आखिर किसके संरक्षण में सर्वमंगला क्रशर का यह अवैध साम्राज्य फल-फूल रहा है? क्या विभागीय अधिकारियों की आंखें किसी बड़े ‘लेन-देन’ के चलते मूंद ली गई हैं, या फिर रसूख के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं?
ग्रामीणों का अल्टीमेटम : “निष्पक्ष जांच हो, वरना होगा आंदोलन” – प्रदूषण और अवैध परिवहन की मार झेल रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। क्षेत्र की जनता में इस कदर आक्रोश है कि उन्होंने दो टूक शब्दों में पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही क्रशर की जांच कर संचालक के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद सो रहा प्रशासन जागता है, या फिर ‘सर्वमंगला क्रशर’ की मनमानी यूं ही बदस्तूर जारी रहती है।




