सरगुजा में 3 करोड़ का लोन महाघोटाला : शिक्षिका को 28 लाख का चूना लगाने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार…

सरगुजा (28 मई 2026) | ‘आप लोन लीजिए, किश्त हम चुकाएंगे’—इस लुभावने और फर्जी वादे के जाल में फंसाकर 10 मासूम लोगों से लगभग 3 करोड़ रुपये ठगने वाले एक शातिर मास्टरमाइंड को सरगुजा पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। डीआईजी एवं एसएसपी श्री राजेश कुमार अग्रवाल के कड़े निर्देशों पर गांधीनगर थाना पुलिस ने इस बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करते हुए आरोपी शिवशंकर दास को गिरफ्तार कर लिया है।
यह पूरा खेल ‘अनशिवआर्या फाउण्डेशन ग्रुप’ नाम की एक फर्जी कंपनी की आड़ में खेला जा रहा था, जिसका शिकार राजपुर ब्लॉक की एक सरकारी शिक्षिका भी बनीं।
ठगी का शातिर ‘मास्टरप्लान’ (Modus Operandi) – आरोपी शिवशंकर दास और उसके गुर्गे ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जिन्हें बड़े लोन की आवश्यकता होती थी। शिकार को फंसाने के लिए यह गिरोह एक बेहद शातिर ‘स्पेशल स्कीम’ का लालच देता था:
- लुभावना ऑफर: ग्राहकों को बताया जाता था कि लोन का 60% हिस्सा कंपनी में जमा करना होगा और 40% ग्राहक खुद रख सकता है।
- जीरो टेंशन का झांसा: सबसे बड़ा लालच यह था कि लोन की पूरी मासिक किश्त (EMI) हर महीने कंपनी खुद चुकाएगी, जिससे ग्राहक को कोई आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
- डिजिटल धोखाधड़ी : विश्वास जीतने के बाद आरोपी व्हाट्सएप के माध्यम से पैन कार्ड, आधार कार्ड, फॉर्म 16 और सैलरी स्लिप मंगा लेते थे और अपनी ‘पकड़’ का इस्तेमाल कर कई बैंकों से भारी-भरकम लोन पास करा लेते थे।
कैसे बुना गया शिक्षिका के खिलाफ जाल? – राजपुर ब्लॉक में पदस्थ शिक्षिका दिव्या एक्का घर बनवाने के लिए 15 लाख रुपये का लोन लेना चाहती थीं। गिरोह ने उन्हें अपने जाल में फंसाया और केवल एक बार बैंक ऑफ इंडिया में हस्ताक्षर करवाकर उनके नाम पर मनमाने ढंग से भारी लोन पास करा लिए:
- आईसीआईसीआई बैंक : 15 लाख रुपये
- बैंक ऑफ इंडिया : 13.40 लाख रुपये
- एचडीएफसी बैंक : 12.68 लाख रुपये
- कुल लोन स्वीकृत : 41.08 लाख रुपये
लोन की रकम खाते में आते ही शातिर आरोपी ने अलग-अलग खातों के जरिए शिक्षिका से 28 लाख रुपये अपने पास ट्रांसफर करवा लिए।
क्रेशर का घाटा और खुलासे की कहानी : पुलिस की सख्त पूछताछ में आरोपी शिवशंकर दास (उम्र 40 वर्ष, निवासी किशुनपुर) ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि वह क्रेशर का संचालन करता था। क्रेशर के भारी नुकसान की भरपाई और पैसे की हवस मिटाने के लिए ही उसने यह ‘फर्जी स्कीम’ रची थी।
शुरुआत में विश्वास बनाए रखने के लिए उसने ठगी के इन्हीं पैसों से कुछ महीनों तक किश्तें भरीं, लेकिन बाद में हाथ खड़े कर दिए। इसी तरह उसने शिक्षिका के अलावा 09 अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया और करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया।
खाकी का सख्त एक्शन : शिकायत मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपराध पंजीबद्ध किया। पुलिस अभिरक्षा में हुई पूछताछ और सबूतों के आधार पर 27 मई 2026 को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस पूरी सर्जिकल स्ट्राइक में थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी, सउनि अभिषेक दुबे, आरक्षक दीनदयाल सिंह और सुल्तान अहमद की भूमिका बेहद अहम रही।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस करोड़ों के घोटाले में बैंक कर्मियों या किसी अन्य सफेदपोश की मिलीभगत तो नहीं है।




