बालोद

डीएमएफ फंड में अनियमितता का आरोप, आयरन रिमूवल प्लांट की जगह सिर्फ खाली डब्बा, भुगतान पर उठे सवाल

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/डौंडी। जिले के डौंडी जनपद क्षेत्र में जिला खनिज संस्थान न्यास निधि (डीएमएफ) से स्वीकृत कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आदिवासी अंचल की पंचायतों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वीकृत आयरन रिमूवल प्लांट की जगह केवल एक छोटा-सा लोहे का ढांचा लगाए जाने और कार्य अधूरा रहते हुए भी ठेकेदार को आधी राशि का भुगतान किए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत अध्यक्ष ने जांच के आदेश दिए हैं।

डौंडी जनपद पंचायत अंतर्गत पटेली, लिमऊडीह, उकारी, पचेड़ा, पथरटोला, सुडोनगर सहित लगभग आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में डीएमएफ मद से आयरन रिमूवल प्लांट स्थापित करने के लिए जनवरी 2025 में 8.15 लाख रुपये प्रति पंचायत की राशि मंजूर की गई थी। इस योजना का मकसद ग्रामीणों को लौह (आयरन) युक्त पानी से राहत दिलाकर स्वच्छ पेयजल मुहैया कराना था। लेकिन 15 महीने बीत जाने के बाद भी अधिकांश स्थानों पर न तो पूर्ण प्लांट लगा है और न ही उससे जल आपूर्ति शुरू हो सकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित स्थानों पर पूर्ण उपकरण लगाने के बजाय सिर्फ 6×6 फीट का एक लोहे का डब्बा (बॉक्स) रख दिया गया है, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो कार्य की केवल औपचारिकता निभाई गई हो। कई पंचायतों में तो निर्माण कार्य का सूचना पटल तक नहीं लगाया गया, जबकि नियमों के अनुसार कार्य का नाम, स्वीकृत राशि, एजेंसी, समय-सीमा और तकनीकी विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना आवश्यक होता है। सूचना पटल न होने से योजना की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस कार्य की अनुमानित लागत 8.15 लाख रुपये बताई गई थी, उसका स्थल पर दिखाई देने वाला स्वरूप बेहद मामूली है। इतनी बड़ी राशि के मुकाबले लगाया गया ढांचा न केवल छोटा है, बल्कि उसकी उपयोगिता और क्षमता पर भी संदेह जताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि 6×6 फीट का बॉक्स किस आधार पर आयरन रिमूवल प्लांट के रूप में स्वीकार किया गया, यह समझ से परे है। वही डौंडी जनपद सीईओ को इसकी खबर तक नहीं जो बड़ा और गहरा सवाल खड़े करती है।

डीडी मंडले, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ)
डीडी मंडले, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ)

सबसे गंभीर सवाल भुगतान प्रक्रिया को लेकर उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कार्य अभी 20 प्रतिशत भी पूर्ण नहीं हुआ है, फिर भी ठेकेदार को लगभग 50 प्रतिशत यानी 4.075 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इससे यह आशंका गहरा गई है कि भुगतान नियमों और तकनीकी जांच के बिना किया गया। यदि कार्य अधूरा था, तो इतनी बड़ी राशि जारी करने के पीछे किस स्तर से स्वीकृति दी गई, यह जांच का विषय बन गया है।

जनपद पंचायत अध्यक्ष मुकेश कौड़ो ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच की बात कही है। उनका कहना है कि उनके संज्ञान में आया है कि आयरन रिमूवल प्लांट के नाम पर केवल ढांचा खड़ा किया गया है और भुगतान भी पहले ही कर दिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि डीएमएफ की राशि का दुरुपयोग कर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्ताहीन कार्य कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि जो योजनाएं ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए बनाई जाती हैं, वही अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही हैं। नर्रालगुड़ा में सीसी रोड और ओपन जिम निर्माण को लेकर पहले ही सवाल उठ चुके हैं और अब आयरन रिमूवल प्लांट का मामला सामने आने से जनकल्याण योजनाओं की विश्वसनीयता पर और अधिक प्रश्नचिन्ह लग गया है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि हर पंचायत में प्राक्कलन, तकनीकी स्वीकृति, कार्य आदेश, भुगतान विवरण और कार्य प्रगति की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि बॉक्स जैसे दिखने वाले ढांचे को किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया। लोगों का कहना है कि यदि योजना का उद्देश्य शुद्ध पानी देना है, तो अधूरे और कम गुणवत्ता वाले कार्य से यह उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

इस पूरे प्रकरण ने डीएमएफ मद के कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों की जवाबदेही तय होती है या मामला अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

“आपके माध्यम से जानकारी मिली है। संबंधित पंचायतों से जानकारी मांगी गई है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।”

डीडी मंडले
मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ)
जनपद पंचायत डौंडी

Feroz Ahmed Khan

संभाग प्रभारी : दुर्ग

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