छत्तीसगढ़ में छुट्टी का ‘महा-संग्राम’ : क्या अभियोजन अधिकारियों के लिए शनिवार सिर्फ एक ‘तारीख’ है?…

भाग 2
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारी शनिवार की छुट्टी मनाएंगे या नहीं, इसे लेकर राज्य शासन और लोक अभियोजन निदेशालय के बीच एक अजीबोगरीब ‘कानूनी जंग’ छिड़ गई है। सूचना के अधिकार (RTI) से निकले दस्तावेजों ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है कि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद अभियोजन अधिकारियों की छुट्टियों पर ग्रहण लगा हुआ है।
सरकार का ‘हथौड़ा’ : “सबके लिए बंद रहेगा दफ्तर” – सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 2 फरवरी 2022 को एक ऐतिहासिक अधिसूचना जारी की थी। इस आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- सभी शनिवार छुट्टी : कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए महीने के प्रत्येक शनिवार को अवकाश घोषित किया गया।
- नया समय : काम के घंटे बदलकर सुबह 10:00 से शाम 05:30 तक कर दिए गए।
- स्पष्ट निर्देश : यह नियम मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर के सभी कार्यालयों पर लागू होता है।
अभियोजन विभाग का ‘हैरान करने वाला’ पैंतरा – जब आरटीआई के जरिए पूछा गया कि क्या यह नियम अभियोजन अधिकारियों पर भी लागू है, तो निदेशालय ने गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया :


- छुट्टी पर चुप्पी : विभाग ने यह साफ नहीं किया कि शनिवार को छुट्टी मिलेगी या नहीं।
- धाराओं का खेल : निदेशालय ने तर्क दिया कि अभियोजन अधिकारियों से कार्य भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 19 और दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 25 के तहत लिया जाता है।
- अजीब दलील : विभाग का कहना है कि उनकी कार्यप्रणाली इन कानूनी धाराओं से तय होती है, न कि सामान्य प्रशासनिक आदेशों से।
बड़ा सवाल : नियम बड़ा या कानून की व्याख्या? – यह मामला अब एक गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। एक तरफ मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम से जारी आदेश है जो सभी कर्मचारियों को शनिवार की राहत देता है, वहीं दूसरी तरफ लोक अभियोजन निदेशालय है जो अपनी विशेष नियुक्ति और अदालती कार्यों की धाराओं को ढाल बनाकर इस राहत को नजरअंदाज कर रहा है।
“क्या शासन का आदेश आधा-अधूरा है, या अभियोजन विभाग खुद को शासन से ऊपर मान रहा है?”
इस ‘धमाकेदार’ खुलासे ने अब शासन के गलियारों में खलबली मचा दी है। जहाँ एक कर्मचारी शनिवार को परिवार के साथ होता है, वहीं अभियोजन अधिकारी धाराओं के जाल में उलझकर दफ्तर जाने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी श्री के.एस. गावस्कर इस पर क्या फैसला सुनाते हैं।
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