ब्रेकिंग न्यूज़ : लैलूंगा के राजपुर में ज़मीन सीमांकन का ‘खेला’! महीनों दबा रहा आदेश, अब ‘शाम’ के बहाने टाली गई कार्रवाई…

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के लैलूंगा तहसील अंतर्गत ग्राम राजपुर में ज़मीन की बंदरबांट और राजस्व अमले की संदिग्ध कार्यप्रणाली की एक और बड़ी पोल खुल गई है। जो आदेश महीनों से फाइलों में धूल फांक रहा था, उस पर जब कार्रवाई शुरू हुई तो ‘शाम के अंधेरे’ का बहाना बनाकर उसे बीच में ही रोक दिया गया। क्या यह महज़ इत्तेफाक है या किसी बड़े ज़मीन घोटाले की तैयारी?

दस्तावेज़ 1002614874.jpg (12 जून 2026 को तैयार किया गया पंचनामा) के सामने आने के बाद कई गंभीर और चुभते हुए सवाल खड़े हो गए हैं।
पंचनामे से सामने आए चौंकाने वाले तथ्य:
- आदेश में भारी लेटलतीफी : तहसीलदार लैलूंगा ने यह आदेश 19/02/2026 को जारी किया था। लेकिन हल्का पटवारी और राजस्व निरीक्षक (RI) को इस खसरा नंबर 380/6 (रकबा 0.676 हेक्टेयर) की सुध पूरे चार महीने बाद 12/06/2026 को आई।
- बहानेबाजी और ‘स्थगन’ : पंचनामे के मुताबिक, ग्रामवासियों की मौजूदगी में सीमांकन का काम शुरू तो कर दिया गया, लेकिन अचानक “शाम होने” का हवाला देकर इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया।
- समय मांगने की साजिश? अब इस सीमांकन के लिए 15/06/2026 की सुबह 8:00 बजे का समय तय किया गया है।
पर्दे के पीछे का ‘खेला’ : आखिर क्या पक रहा है राजपुर में? – ज़मीन से जुड़े मामलों और भ्रष्टाचार की परतों को उधेड़ने पर जो बात सबसे पहले खटकती है, वो है यह ‘टाइमिंग’।
- चार महीने का सन्नाटा क्यों? फरवरी का आदेश जून तक क्यों अटका रहा? क्या इस बीच किसी ‘खास’ व्यक्ति को फायदा पहुंचाने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी?
- शाम का बहाना या ‘सेटिंग’ का इंतज़ार? जो काम मौके पर शुरू हो चुका था, उसे बीच में रोकना कई संदेह पैदा करता है। ज़मीन के खेल में 3 दिन का समय (12 से 15 जून) किसी भी नक्शे और दस्तावेज़ को पलटने के लिए काफी होता है। क्या यह समय भू-माफियाओं या रसूखदारों के दबाव में किसी ‘समझौते’ के लिए लिया गया है?
आगे क्या? – पंचनामे पर मौजूद ग्रामीणों के हस्ताक्षर (जिसमें स्वयं आपकी भी मौके पर मौजूदगी दर्ज है) इस बात का प्रमाण हैं कि जनता अब मूकदर्शक नहीं है। RM24 जैसी तेज़-तर्रार और बेखौफ डिजिटल पत्रकारिता के दौर में राजस्व विभाग के अधिकारी अब बंद कमरों में फैसले नहीं ले सकते।
15 जून की सुबह 8 बजे राजपुर की उस 0.676 हेक्टेयर ज़मीन पर सिर्फ फीता नहीं नापा जाएगा, बल्कि लैलूंगा के राजस्व अमले की ईमानदारी का भी इम्तिहान होगा। अब देखना यह है कि सोमवार की सुबह न्याय होता है, या फिर ‘खेला’ कोई नया मोड़ लेता है। हमारी पैनी नज़र इस मामले पर लगातार बनी रहेगी!




