वर्दी तार-तार, खाकी शर्मसार! पेंड्रा में लेडी फॉरेस्ट गार्ड को जमीन पर पटक-पटक कर पीटा, फाड़ी वर्दी…

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM): छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब रक्षक ही उनके निशाने पर हैं! ड्यूटी पर तैनात एक महिला वन रक्षक के साथ न केवल सरेआम गाली-गलौज और बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि दबंगों ने हाथापाई करते हुए उनकी शासकीय वर्दी तक फाड़ दी। आरोपियों ने खुलेआम खौफनाक धमकी दी है कि “जंगल में अकेली मिली, तो जान से मार देंगे!”
घटना के मुख्य बिंदु :
- तारीख और समय: 10 जून 2026, सुबह करीब 9 बजे।
- स्थान: पेंड्रा थाना क्षेत्र का लाटा परिसर (कक्ष क्रमांक 2350)।
- पीड़िता: महिला वन रक्षक गिरिजा कंवर।
- आरोपी: इतवारू भैना, उसकी पत्नी सुमित्रा और सास दयावती।
- विवाद की जड़: घर के आंगन में रखी अवैध ‘सागौन की बल्ली’।
क्या है पूरा सनसनीखेज मामला?
- अवैध सागौन की धरपकड़ और दबंगों का खौफ : प्राप्त जानकारी के अनुसार, लेडी फॉरेस्ट गार्ड गिरिजा कंवर अपने सुरक्षा श्रमिकों के साथ जंगल की नियमित गश्त पर थीं। इसी दौरान उनकी नजर इतवारू भैना के घर के आंगन में रखी सागौन की बल्ली पर पड़ी। जैसे ही वन रक्षक ने लकड़ी की तस्दीक के लिए पूछताछ शुरू की, आरोपियों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
- जमीन पर पटका, शासकीय काम में डाली बाधा : पूछताछ से बौखलाए इतवारू, उसकी पत्नी सुमित्रा और सास दयावती ने वन रक्षक पर सीधा हमला बोल दिया। विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने शासकीय ड्यूटी कर रही महिला अधिकारी को बेरहमी से जमीन पर पटक दिया, जिससे उनकी सरकारी वर्दी फट गई।
- ‘अकेली मिली तो जिंदा नहीं छोड़ेंगे’ : दबंगई की इंतहा तब हो गई जब आरोपी सुमित्रा ने महिला वन रक्षक की आंखों में आंखें डालकर सीधी धमकी दी – अगर वह दोबारा जंगल में अकेली नजर आईं, तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। इस खौफनाक धमकी ने वन अमले की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस का कड़ा एक्शन : FIR दर्ज – इस चौंकाने वाली घटना के बाद हिम्मत दिखाते हुए पीड़िता ने पेंड्रा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है:
- लगाई गई धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 121(1), 132, 296, 351 (3) और 3(5)।
पुलिस ने तत्काल प्रभाव से वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन इस दुस्साहसिक वारदात ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब खाकी पहनने वाले रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो जंगलों की सुरक्षा आखिर कैसे होगी?




