रायगढ़

“मंत्री के दावे फेल, घरघोड़ा में सारडा एनर्जी का खेल! क्या प्रशासन ने बेच दी है किसानों की जमीन?…”

रायगढ़। विधानसभा की कार्यवाही और मंत्रियों के आश्वासनों की फाइलें जब जमीनी हकीकत से टकराती हैं, तो सच राख की तरह उड़ता नजर आता है। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा क्षेत्र में इन दिनों फ्लाई-ऐश (राखड़) का अवैध साम्राज्य फल-फूल रहा है। प्रदेश के वित्त मंत्री ने सदन में सीना ठोककर कहा था कि ‘मॉडल SOP’ लागू है और कृषि भूमि पर डंपिंग प्रतिबंधित है, लेकिन घरघोड़ा की मिट्टी इस दावे पर कालिख पोत रही है।

सत्ता को चुनौती देता ‘राखड़ का पहाड़’ – सारडा एनर्जी द्वारा हजारों टन फ्लाई-ऐश को आवंटित कृषि भूमि पर डंप किया जाना किसी बड़े घोटाले से कम नहीं है। सवाल यह है कि क्या सारडा एनर्जी प्रशासन से ऊपर है? जिस जमीन पर धान की बालियां लहलहानी चाहिए थीं, वहां अब जहरीली राख का ढेर है।

इन 7 सुलगते सवालों का जवाब कौन देगा? – क्षेत्र की जनता और किसानों के मन में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर तीखे सवाल हैं :

  • कृषि भूमि पर ‘मौत’ का भंडारण : क्या धान उत्पादन वाली उपजाऊ जमीन को औद्योगिक कचरे का डंपिंग यार्ड बनाना उचित है?
  • नियमों की धज्जियां : टावर लगी जमीन और समतल खेतों को खोदकर उसमें राख भरना किस ‘परमिशन’ के तहत वैध है?
  • समीपवर्ती खेती पर संकट : जिस जमीन से सटकर खेती हो रही है, वहां राखड़ का जहर फैलाना किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार नहीं है?
  • प्रशासन की ‘कुंभकर्णी’ नींद : दिन-रात सैकड़ों डंपर गुजर रहे हैं, धूल उड़ रही है, पर प्रशासन मौन है। क्या यह लापरवाही है या फिर कोई गहरी साठगांठ?
  • पटवारी और पंचायत की भूमिका : जमीन निजी है या सरकारी (आबंटित), इस पर राजस्व अमला स्पष्ट क्यों नहीं है? क्या जानबूझकर दस्तावेजों में लीपापोती की जा रही है?
  • शिकायत पर ‘ठंडा’ रुख : एक युवा नेता द्वारा साक्ष्यों के साथ शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति क्यों हो रही है? क्या विभाग के हाथ-पांव उद्योगपतियों के रसूख के आगे फूल रहे हैं?
  • मंत्री की घोषणा का अपमान : यदि वित्त मंत्री की घोषणा के बाद भी डंपिंग जारी है, तो क्या इसे सीधे तौर पर शासन की अवमानना नहीं माना जाना चाहिए?

जहरीली हो रही है घरघोड़ा की तासीर – विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई-ऐश न केवल जमीन की उर्वरता खत्म करती है, बल्कि यह भूजल (Groundwater) को भी जहरीला बना रही है। आने वाले समय में घरघोड़ा के लोग सांस की बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं की चपेट में आ सकते हैं।

बड़ा सवाल : क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है? या फिर ‘सफेद हाथी’ बन चुके विभाग केवल कागजी नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेंगे?

​घरघोड़ा की जनता अब ‘राखड़ राज’ से मुक्ति चाहती है। यदि जल्द ही सारडा एनर्जी और इस अवैध खेल में शामिल अधिकारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह आक्रोश सड़क से लेकर सदन तक फिर से गूंजेगा। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि उसके लिए जनता की सांसे कीमती हैं या उद्योगों का मुनाफा?

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Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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