वर्दी की हनक या भ्रष्टाचार पर पर्दा? कोरबा में डिप्टी रेंजर ने ग्रामीणों को दी ‘1 मिनट में उठवा लेने’ की धमकी, वीडियो वायरल…

कोरबा। कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र से सरकारी तंत्र की तानाशाही और बदजुबानी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम जलके में वन विभाग द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की पोल खोलना ग्रामीणों को भारी पड़ गया। ग्रामीणों के जायज सवालों पर बौखलाए डिप्टी रेंजर अयोध्या सोनी इस कदर आपा खो बैठे कि उन्होंने ग्रामीणों को खुलेआम ‘एक मिनट के भीतर उठवा लेने’ की धमकी दे डाली।
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने वन महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला? – मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम जलके में ‘ग्राम वन प्रबंधन समिति’ के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान ग्रामीणों ने विभाग द्वारा क्षेत्र में कराए जा रहे निर्माण कार्यों और फेंसिंग (घेराबाड़ी) में बड़े पैमाने पर हो रही धांधली व भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा दिया।
ग्रामीणों का आरोप : फेंसिंग और निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।
जब ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद अफसरों से इस वित्तीय गड़बड़ी पर जवाब मांगा, तो जवाब देने के बजाय डिप्टी रेंजर अयोध्या सोनी भड़क गए। उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से सवाल पूछ रहे ग्रामीणों को ही डराना-धमकाना शुरू कर दिया और बेहद तल्ख लहजे में कहा कि “एक मिनट में उठवा लूंगा।”
अधिकारी जनता के सेवक हैं या तानाशाह? – इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि:
- लोकतंत्र में सरकारी अधिकारी जनता के सेवक होते हैं, न कि उनके शोषक या तानाशाह।
- किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर जनता को अगवा करने या उठवाने की धमकी दे।
- ग्रामीण अब भयभीत भी हैं और आक्रोशित भी।
ग्रामीणों की मांग : जांच हो और कार्रवाई भी – पीड़ित ग्रामीणों ने अब इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:
- बदजुबानी और पद का दुरुपयोग करने वाले डिप्टी रेंजर अयोध्या सोनी पर तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- पसान वन परिक्षेत्र के ग्राम जलके में हुए फेंसिंग और तमाम निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आ सके।
बड़ा सवाल: कार्रवाई होगी या फाइल दबी रह जाएगी? – वीडियो साक्ष्य के रूप में सामने आने के बाद अब गेंद वन विभाग के आला अधिकारियों के पाले में है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग अपने इस रसूखदार अधिकारी के खिलाफ सख्त कदम उठाकर जनता का विश्वास बहाल करेगा? या फिर हर बार की तरह जांच का भरोसा देकर इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा और भ्रष्टाचार पर पर्दा गिरा दिया जाएगा? जनता अब जवाब का इंतजार कर रही है।




